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प्राइवेट अंग खींचे गए, स्किन से बाल उखाड़े ऐसा नशे में ही किया जा सकता है: एक्सपर्ट

3 वर्ष पहले
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7 दोस्तों के साथ सनौर थाने में की गई दरिंदगी की पुष्टि राजिंदरा अस्पताल के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने भी कर दी है। मंगलवार को डॉक्टरी जांच के बाद एक युवक के प्राइवेट अंगों को नुकसान पहुंचाने का खुलासा हुअा है। इसके अलावा डाॅक्टराें ने पैनिकल टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल खरड़ स्थित लैब में कैमिकल जांच को भेज दिए हैं। एसएसपी मंदीप सिंह सिद्धू की सिफारिश पर डिप्टी कमिश्नर कुमार अमित ने मजिस्ट्रेट जांच के अादेश भी जारी कर दिए हैं। एसडीएम अनमोलदीप सिंह को यह जांच दी गई है। इसी बीच मामले में सियासी रंगत भी देखी गई। मंगलवार को राजिंदरा अस्पताल में भर्ती पीड़ित युवक का हाल जानने के लिए अाम अादमी पार्टी के नेता आैर विधानसभा में नेता विपक्ष हरपाल सिंह चीमा, पार्टी के कार्यकारी उप-प्रधान डॉ. बलबीर सिंह अौर बागी नेता सुखपाल खैहरा अलग-अलग ग्रुपों में पहुंचे। सुखपाल खैहरा तो बाद में इस मामले को लेकर एसएसपी को भी मिले अौर अारोपी पुलिस स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। देर शाम सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी अौर यूनाइटेड सिख पार्टी के भाई जसविंदर सिंह राजपुरा ने भी अस्पताल जाकर पीड़ित का हाल जाना। गौर हो कि रविवार रात लगभग 11 बजे गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में कीर्तन सुनने अा रहे सनौर के 7 दोस्तों को बीच रास्ते नाका लगाकर खड़े सनौर पुलिस थाने के एएसअाई नरिंदर सिंह ने रोक लिया था। दोनों पक्षों में कहासुनी होने के बाद पुलिस ने इन सातों युवकों को थाने में ले जाकर निर्वस्त्र कर दरिंदगी की हदें पार की। प्राइवेंट अंगों को खींचा गया। स्किन से बाल तक उखाड़ दिए गए। साइकोलॉजी के एक्सर्ट का कहना है कि ऐसा हद से ज्यादा नशे की हालत में ही किया जा सकता है। उधर अारोपी एएसअाई नरिंदर सिंह को सोमवार को ही एसएसपी ने सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया था। सोमवार को ही सनौर के विधायक हरिंदरपाल चंदूमाजरा ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों का हाल जान अारोपी पुलिस स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

राजिंदरा फोरेंसिक डिपार्टमेंट की रिपोर्ट-निजी अंगों को नुकसान, इतने बड़े मामले में सिर्फ एएसआई सस्पेंड, बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं

सियासी रंग: खैहरा आैर नेता विपक्ष हरपाल चीमा अस्पताल पहुंचे

पीड़ित परिवार का आरोप: अस्पताल प्रबंधन ने फाइल गुम कर दी... पीड़ित युवक के परिवार ने मंगलवार सुबह अस्पताल प्रबंधन पर इलाज की सरकारी फाइल जानबूझ कर गुम करने का अारोप लगा हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि पुलिस प्रशासन की मदद करने को लेकर यह साजिश रची जा रही है। चूंकि अस्पताल प्रशासन को पता था कि मंगलवार को कई सियासी दल युवक का हाल जानने के लिए अा रहे हैं, इसलिए अस्पताल में दाखिल युवक को 1 नंबर वार्ड से शिफ्ट करके 13 नंबर वार्ड में भेज दिया है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की तरफ से वार्ड इंचार्ज डॉ. अाशीष भगत ने इन सभी अारोपों को सिरे से खारिज करते हुए सफाई दी है कि फाइल गुम नहीं, बल्कि संभाली गई है। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है अौर किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने की संभावना को देखते हुए उन्हें खुद यह फाइल अपने पास संभाल ली है।

हरेक पर नजर: वार्ड के बाहर दिन भर तैनात रहे पुलिस मुलाजिम...पुलिस तशद्दत का शिकार हुए युवकों का हाल जानने के लिए अाज राजिंदरा अस्पताल के वार्ड 13 में दिन भर सियासी दलों का तांता लगा रहा। इधर वार्ड के बाहर दिन भर पुलिस मुलाजिम तैनात रहे जो हर अाने जाने वाले पर नजर रखते रहे। राजिंदरा अस्पताल के अंदर पुलिस चौंकी के स्टाफ ने सुबह से ही वार्ड के बाहर मोर्चा लगा लिया जो देर रात तक जारी रहा। वहीं देर शाम को पूर्व केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा युवकों से हुई अमानवीयता पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा कि सनौर थाने में हुई यह घटना बहुत गलत है। इससे साबित होता है कि पुलिस के उच्चाधिकारियों का थानों पर कंट्रोल नहीं है। उन्होंने पता ही नहीं होता कि उनके जूनियर क्या कर रहे हैं।

आगे क्या...मानवाधिकारों के उल्लंघन पर सरकार पर हो सकता है जुर्माना

क्रिमिनल मामलों के एक्सपर्ट एडवोकेट ने बताया कि ऐसे मामले सीधे-सीधे मानवाधिकारों का उल्लंघन माने जाते हैं। अगर मानवाधिकार आयोग इस मामले में संज्ञान लेता है तो प्रदेश सरकार को जवाब देना पड़ सकता है। ऐसे मामले में अमूमन सरकार को पीड़ित परिवार को हर्जाना देना पड़ता है। पीड़ित को दी जाने वाली जुर्माने की राशि मानवाधिकार आयोग या फिर कोर्ट तय करता है।

उधर, साइकोलॉजी आैर मेडिसन से जुड़े डाक्टरों का कहना है कि लड़कों के साथ हुई ऐसी अमानवीय घटना को कोई भी उस स्थिति में अंजाम देता है जब वो नशे की ओवरडोज में हो। नहीं तो नार्मल इंसान के लिए ऐसा सोच पाना या कर पाना असंभव है। समलिंगी सामले में तो ऐसा होता ही नहीं है। इसे अलावा दूसरी स्थिति सहनशीलता की कमी होना है। इस अवस्था में भी इंसान गुस्से में आकर आपे से बाहर हो जाता है। उसका अपने दिमाग पर नियंत्रण नहीं रहता। उसके अंदर जो बहशीपन होता है वह उसे इस स्थिति में निकालता है जिससे ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।

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