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स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण तिथियों से युवा पीढ़ी सीख ले

3 वर्ष पहले
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विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि 1915 के दौर में महात्मा गांधी भारतीय आजादी के आंदोलन में सक्रिय हुए। इसके चार साल बाद 1919 में घटित जलियांवाला बाग की घटना ने पूरे देश को गांधी के पीछे खड़ा कर दिया। अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों के खिलाफ क्रांतिकारियों ने अद्‌भुत संघर्ष किया। स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण तिथियों से युवा पीढ़ी को सीख लेना जरूरी है। वे शुक्रवार को बीआईए सभागार में युवा चेतना द्वारा आयोजित जलियांवाला बाग में शहीद हुए देशभक्तों की स्मृति में 99वां श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उद्‌घाटन करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन की पहली लड़ाई हुई थी। लेकिन 13 अप्रैल 1919 को घटित जलियांवाला बाग कांड ने लोगों को एकजुट कर दिया। इसके परिणामस्वरूप 1947 में आजादी मिली। लेकिन, देश की सभी राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रहित से भटक गई हैं। जनता को जात-पात के नाम पर दिग्भ्रमित कर सत्ता का आनंद लेने में लगी है। इससे बचने के लिए युवाओं को भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद के सिद्धांतों को आत्मसात करने की जरूरत है।

इस तारीख को देश कभी भूल नहीं सकता
बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि जलियांवाला बाग कांड अंग्रेजों द्वारा भारतीयों का नरसंहार था। इस तारीख को देश कभी भूल नहीं सकता। पंडित मदन मोहन मालवीय ने इस कांड का तथ्य जुटाकर जब ब्रिटिश पार्लियामेंट को संबोधित किया तो संसद में बैठे अंग्रेज सांसदों को निर्मम नरसंहार की स्थिति समझ में आई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि देश जलियांवाला कांड में शहीद हुए हजारों देशभक्तों का आजीवन ऋणी है। समारोह को पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. जीसी जायसवाल, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के अध्यक्ष सुनीत कुमार, डॉ. अहमद अब्दुल हई, डॉ. अर्जुन सिंह, उपेंद्र चौहान, दीपक ठाकुर आदि ने संबोधित किया।

कार्यक्रम का उद‌्घाटन करते विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, रोहित कुमार सिंह व अन्य।

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