निजी अस्पतालों में भी मोतियाबिंद का आॅपरेशन कराने पर मिलेगा अनुदान
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम से जुड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी मोतियाबिंद का आॅपरेशन या रेटिना का इलाज कराने पर सरकारी अनुदान मिलेगा। हालांकि उसकी वार्षिक आय ढाई लाख से कम होनी चाहिए। ऐसे मरीजों को मोतियाबिंद के आपरेशन के लिए 20 हजार रुपए और रेटिना के इलाज के 40 हजार रुपए अनुदान मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आईजीआईएमएस के क्षेत्रीय चक्षु संस्थान (नेत्र विभाग) को 154 करोड़ की लागत विकसित किया जाएगा। यहां 200 बेड की सुविधा होगी। इसके अलावा यहां तमाम नेत्र रोग से संबंधित इलाज की आधुनिक सुविधाएं होंगी।
उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को भी कोर्निया ट्रांसप्लांट करने के लिए लाइसेंस दिया जा रहा है। ऐसे अस्पताल जिनके पास कोर्निया ट्रांसप्लांट करने की सुविधा है वे लाइसेंस ले सकते हैं। कुछ प्राइवेट अस्पतालों को लाइसेंस दिया भी गया है। स्वास्थ्य मंत्री पटना ऑप्थेलमोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में बोल रहे थे। सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों के नेत्र रोग विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने आंख की गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक पर चर्चा की।
विशेषज्ञों में डॉ. अमोद गुप्ता, डॉ. अजित बाबू मांझी, डॉ. दिनेश तलवार, डॉ. विक्रमजीत पाल, डॉ. ललित वर्मा, किशोर पाहुजा, डॉ.कमलजीत सिंह, डॉ. उदयन दीक्षित, डॉ. संतोष होनवर, डॉ. एस भट्टाचार्य, डॉ. राजेश सिन्हा, डॉ. सौरभ सिन्हा,डॉ. दीपक मिश्रा, डॉ. मनीष टंडन आदि शामिल हैं। सम्मेलन में पहली बार अंतरराज्यीय लाइव सर्जरी टेलीकास्ट की गई। सचिव डॉ. सुनील परमार ने बताया कि 2018-19 लिए डॉ. शरत कुमार ने नए अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया जबकि डॉ. अजय कुमार गुप्ता उपाध्यक्ष चुने गए। डॉ. परमार ने कहा कि दूसरे दिन का सम्मेलन आईजीआईएमएस के सभागार में आयोजित किया गया है। डॉ. सुनील कुमार सिंह वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता की। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रणव रंजन, डॉ.वीपी सिन्हा, डॉ. निलेश मोहन, डॉ. सत्यजीत समेत काफी संख्या में देश के विभिन्न शहरों के नेत्र रोग विशेषज्ञ मौजूद थे।
सम्मेलन में उपस्थित डॉ सुनील कुमार सिंह व अन्य विशेषज्ञ।