ज्योतिषाचार्यों ने एक मत से कहा- काल सर्प योग भ्रांति
पटना|ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान की ओर से आईएमए हॉल में महान गणितज्ञ आर्यभट्ट जयंती पर आयोजित सम्मेलन में जुटे ज्योतिषाचार्यों ने एक मत से काल सर्प योग को नकार दिया।
अतिथियों का स्वागत संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा ने किया। कहा कि काल सर्प योग एक भ्रांति है। आज कुछ लोग काल सर्प योग के नाम पर खाने-कमाने का धंधा चला रहे हैं। इससे शास्त्र की मर्यादा और परंपरा धूमिल हो रही है। यह भी कहा कि ज्योतिष शास्त्र व धर्मशास्त्र में जो विसंगति आ रही है, सनातन परंपरा के विरुद्ध है। समारोह का उद्घाटन दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामचंद्र झा ने किया और कहा कि आर्यभट्ट ने 23 वर्ष की उम्र में शून्य को खोजा था। ऐसे आयोजनों से आर्यभट्ट के बारे में लोगों को जानने में मदद मिलेगी। मुख्य अतिथि बीएचयू ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. रामजीवन मिश्र ने कहा कि ज्योतिष के परंपरागत ज्ञान और आर्यभट्ट की विरासत को प्रभावशाली बनाकर नई पीढ़ी के सामने लाने की आवश्यकता है। समारोह में बीएचयू के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. शत्रुघ्न त्रिपाठी, विनोदानंद झा, देवनारायण झा, सत्य नारायण झा, डॉ. शिवाकांत झा, रामसेवक चौधरी आदि ने विचार रखे।
आर्यभट्ट जयंती समारोह