मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा फल भोगता है
कोई किसी को सुख या दुख नहीं देता, सभी अपने कर्मों का फल भोगते हैं। मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसी के अनुरूप फल भोगता है। यह कहना है भागवत मर्मज्ञ आचार्य दामोदर दास जी महाराज का। बुधवार को बैंक रोड स्थित एमएस मेंसन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य जी ने कहा कि इस संसार में कर्म ही प्रधान है। अगर कोई आपका कट्टर दुश्मन बन जाता है, बावजूद इसके अगर वह आपके शरणागत हो जाता है, तो वैसी स्थिति में मनुष्य को सारे भेदभाव व दुर्भावना को भुलाकर दुश्मन को माफ कर देना चाहिए।
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए दामोदर दास जी ने कहा कि लक्ष्मी का आगमन दो तरह से होता है। कमल रूपी लक्ष्मी शाश्वत होती है और उल्लू रूपी लक्ष्मी यानी धन बह जाने वाला होता है, जैसे काला धन। इसलिए मनुष्य को हमेशा सुकर्म से धन कमाना चाहिए। आजकल आदमी दूसरों को जानने के लिए व्याकुल रहता है। लेकिन अपने अाप काे जानना ज्यादा जरूरी है। खुद को जाने बगैर भगवत प्राप्ति नामुमकिन है। आयोजक मधुमेश चौधरी, सारिका चौधरी, रितिक चौधरी, रिया चौधरी, रौशन कुमार, पप्पू सिंह, पुष्करलाल अग्रवाल, आशा चौधरी, डिंपी चौधरी, नीता प्रसाद, सुजीत कुमार आदि मौजूद थे।