शनिवार को पटना सहित क्षेत्र के 84 गांवों की बिजली सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक 8 घंटे बिजली गुल रहने से आम लोगों के साथ साथ व्यापारी परेशान रहे। बिजली गुल रहने से आम जन जहां गर्मी से परेशान नजर आए वहीं इलेक्ट्रानिक दुकान, वैल्डिंग दुकान, धान चक्की व आटा चक्की सहित अन्य व्यापारियों के अलावा फसलों की सिंचाई करने के लिए किसान दिन भर परेशान रहे। शाम 7 बजे सुधार कार्य होने के बाद लौटी बिजली तक लोगों को राहत मिला। बिजली गुल रहने से ट्यूबवेल बंद होने के कारण कई ग्रामिण पीने, नहाने व दैनिक उपयोग के लिए पानी की कमी के कारण भी परेषान रहे।
बिजली विभाग के द्वारा हर साल मेंटनेंस के नाम पर बिजली काट कर कागजों में मेंटनेंस का कार्य पूरा कर लिया जाता है जिसके कारण न तो झुके हुए बिजली के खम्भों को सीधा नहीं किया जाता, ढीले लटकते तरंगीत तारों को दुरुस्त नहीं किया जाता जिसके कारण क्षेत्र के शहरी एवं ग्रामिण क्षेत्रों में एक दो नहीं बल्की भारी संख्या में बिजली के कई खम्भे टेढ़े पड़े हुए हैं और ढीला होकर तरंगीत तार कम उंचाई पर लटक रहे है। जो हल्की सी हवा चलने पर एक दूसरे से संटने के साथ उलझ जाते हैं जिससे शार्ट होकर बिजली गुल हो जाती है। इसके लिए बिजली विभाग को मौखिक रूप से एवं आवेदन देकर लचर बिजली व्यास्था में सुधार लाने के लिए कई बार आवेदन देने के साथ पटना के कनिष्ठ अभियंता कार्यालय का घेराव गांवों में लचर बिजली व्यवस्था और शिकायत के बाद भी सुधार न होने पर कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुका है। लेकिन बिजली व्यवस्था नहीं सुधर रही है।
मेंटेनेंस के नाम पर पेड़ों की डगाल काटने में लाखों खर्च
पटना क्षेत्र में बिजली विभाग के द्वारा हर साल गर्मी के दिनों घंटों बिजली गुल कर मेंटनेंस के नाम पर बिजली के तरंगीत तारों के आस पास के पेड़ों की डगाल काटकर मेंटनेंस कार्य पूरा कर लिया जाता है इस साल भी इसी तरह से मेंटनेंस का कार्य बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है जबकी जगह जगह पर ढ़ीले पड़े तरंगीत तारों को दुरूस्त नहीं किया जा रहा है, इलेवन केवी हाई वोल्टेज के तरंगीत तार काफी नीचे आ गए हैं जिसकी उंचाई बढ़ाने के लिए किसी प्रकार की व्यस्था या पहल नहीं की जा रही है ऐसे में हो रहे मेंटनेंस कार्य पर सवाल उठने लगा है। वहीं मेंटनेंस कार्य में बिजली के तारों के आस पास स्थित पेड़ों की काटकर मेंटनेंस कार्य में बिजली विभाग के कर्मचारियों को लगाया गया है जिनकी महिने का वेतन 30 से 40 हजार रुपए है। जिनसे पेड़ों की डगाल कटवाने का काम लिया जा रहा है।