साहब तालाब में पानी नहीं रुकता है। जल संरक्षण के लिए जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। तालाब में पानी न होने की वजह से गांव में दो लोगों की मौत हो चुकी है । ग्राम पंचायत पूटा के अंगा में 5 वर्ष पूर्व सरकारी तालाब का गहरीकरण कार्य कराते हुए घाट निर्माण, बेस बियर निर्माण कार्य पंचायत ने कराया गया था। जिसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है क्योंकि जिस वर्ष निर्माण कार्य पूरा हुआ उसी वर्ष पहली बरसात में बेसबियर और घाट टूट गया था, जिसका सुधार कार्य पंचायत ने नहीं कराया, टूटे बेसबियर व घाट के कारण तालाब में बरसात का पानी आता है, लेकिन जिस तरह से बहते हुए आता है उसी तरह से बह जाता है। तालाब में पानी न रुकने के कारण ग्रामिणों को निस्तार कार्य के लिए गांव से करीब 2 किमी दूसरे तालाब में जाना पड़ता है । तालाब गांव से दूर व सूनसान स्थान पर होने के कारण तालाब में स्नान करते समय दो बच्चों की मौत डूबने से चुकी है, घटनाओं को बताते हुए ग्रामीणों का कहना है कि गांव के तालाब में पानी होता तो निस्तार कार्य में इसी के पानी का उपयोग करते तो ऐसी घटना नहीं होती।
तालाब में पानी न रुकने से निस्तार कार्य के लिए दूसरी जगह जाने की मजबूरी
तालाब जिसमें बरसात का पानी ठीक से नहीं रुकता।
जल संरक्षण के लिए सरकार ने लाखों खर्च किए, लेकिन हालात पहले जैसे
छग के सिंचाई मंत्री व प्रशासन कहता है कि जल संरक्षण जरूरी है पर जैसा अंगा में दिख रही है जहां लाखों रुपए खर्च होने के बाद विभागिय अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण बेसबियर व घाट ठीक से साल भर नहीं टिक सका जिस वजह से अब बरसात का पानी रुकने के बजाए बह जाता है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए सरकार लाखों रुपए देने के बाद भी अफसरों व पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही की भेंट चढ़ता रहेगा तो जल संरक्षण शायद ही संभव होगा यह सवाल ग्रामीण पंचायत प्रतिनिधियों से कर रहे हैं।
जल संरक्षण के लिए प्रशासन ने अब तक नहीं किए कोई भी उपाय
छग के पूर्व वित्तमंत्री व सिंचाई मामलों के विशेषज्ञ डॉ. रामचंद्र सिंह देव घटते जल स्तर को लेकर कई बार राज्य सरकार व प्रशासन को जल संरक्षण करने के लिए सलाह देते हुए गंभीर होने की बात कही, कई बार पत्र लिखकर चिंता जताते हुए कहा कि दिन प्रतिदिन भूजल का स्तर कम होते जा रहा है उसे बचाने के लिए तालाबों, कुआं, ड़बरी, नहरों, स्टाप डेम और बांधों का संरक्षण करने की आवश्यकता है ताकि बरसात के समय व्यर्थ बहने वाला पानी अधिक मात्रा में संरक्षित किया जा सके, आने वाले समय में भूजल स्तर को बचा पाएंगे शासन प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।