पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Patna
  • मकान मालिक को बिना बताए ही संचालक पांच दिन पहले हो गया गायब

मकान मालिक को बिना बताए ही संचालक पांच दिन पहले हो गया गायब

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पाटलिपुत्र कॉलोनी में स्थित ईकार्ड अल्पवास गृह के मामले में एसएसपी ने संचालक व अन्य को गिरफ्तार करने के लिए एसआईटी गठित कर दी है। सिटी एसपी सेंट्रल अमरकेश के नेतृत्व में टीम गठित की गई है। इसमें विधि-व्यवस्था डीएसपी एमके सुधांशु, पाटलिपुत्र थानेदार टीएन तिवारी व महिला थानेदार रवि रंजना के साथ स्पेशल सेल के टेक्निकल अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस अल्पवास गृह में संवासिनों को प्रताड़ित करने को लेकर पाटलिपुत्र थाने में केस दर्ज होने के बाद पुलिस गंभीर है। एसआईटी संचालक नरेंद्र सिंह के अलावा अल्पवास गृह से जुड़े विश्वजीत से पूछताछ करने के लिए छपरा जाएगी। पुलिस इस बात की तफ्तीश करेगी कि अल्पवास गृह में किन-किन लोगों का आना-जाना था। पुलिस नरेंद्र और विश्वजीत के मोबाइल का सीडीआर भी खंगालेगी। यह भी जांच होगी कि आखिर एक संवासिन ने खुदकुशी क्यों की थी? टिस की ऑडिट में यहां भी कई तरह की अनियमतताएं पाई गई थीं।

पाटलिपुत्र के अल्पवास गृह मामले की जांच के लिए एसआईटी, संचालकों और संवासिनों से होगी पूछताछ

इन बिंदुओं पर होगी जांच : किन-किन लोगों का था आना-जाना, संवासिन ने क्यों की थी आत्महत्या

नहीं दिया दो माह का किराया

पिछले तीन साल से यह अल्पवास गृह पाटलिपुत्र काॅलोनी के 224 बी में चल रहा है। यह मकान अलका का है, जो परिवार के साथ बेंगलुरु में रहती हैं। उन्हें पड़ोसियों ने बताया कि उनका मकान खाली कर अल्पवास गृह संचालक चले गए हैं। अलका ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद वे पटना पहुंचीं। कहा-पांच दिन पहले संचालक व अन्य लोग चले गए हैं। दो माह का किराया भी नहीं दिया है। इधर, थानेदार टीएन तिवारी ने बताया कि पुलिस हर पहलू पर छानबीन करने में जुटी है। जल्द ही पुलिस की टीम छपरा को रचाना होगी जहां के दोनों रहने वाले बताए जाते हैं। इस बाबत केस करने वाली जिला प्रोग्राम पदाधिकारी भारती प्रियंबदा से भी इस बाबत और जानकारी ली जाएगी।

शौचालय के डब्बे से नहाती थीं संवासिन

पटना| पाटलिपुत्र स्थित अल्पवास गृह में रहने वाली संवासिनों को नहाने के लिए शौचालय का डब्बे का प्रयोग करना पड़ता था। वहां आठ दिनों तक रहने वाली एक लड़की ने बताया कि सजा देने के लिए मैडम शौचालय में इस्तेमाल किए जाने वाले डब्बे से नहाने को कहती थी। उतने से भी मन नहीं भरता तो मारती-पीटती थी। घर जाने नहीं दिया जाता था। खाने के लिए केवल चावल और पानी वाली दाल मिलती थी। सभी लड़कियां छुप-छुप कर रोती थीं ताकि मैडम गुस्सा न करें। वहीं लड़कियों को जबरदस्ती काम करने को कहा जाता था। काम नहीं करने पर उन्हें मारा-पीटा जाता था। अल्पवास गृह में 18 से साल से ऊपर की महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा देने का प्रावधान है। लेकिन पटना के इस अल्पवास गृह में पीड़ित महिलाओं के अलावा 18 साल से कम की बच्चियों, बुजुर्ग महिलाओं और मानसिक रूप से बीमार महिलाओं को भी रखा जाता था। तीन दिनों तक यहां रही एक नाबालिग ने बताया कि वहां कुछ पागल महिलाएं भी रहती थीं। उनसे महिलाएं परेशान रहती थीं।

खबरें और भी हैं...