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मुख्यमंत्री ने किया आह्वान तो शराब की भट्ठियों तक पहुंच गईं महिलाएं

3 वर्ष पहले
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गोपालगंज के कुचायकोट के सिमरिया गांव में शराबबंदी के बाद भी जीविका से जुड़ी महिलाएं निगरानी करती हैं कि कहीं कोई शराब पीकर तो गांव में प्रवेश नहीं कर रहा। यह महिलाओं का संकल्प व साहस ही था कि शराब की दुकानें गांव से बाहर करने में उन्हें सफलता मिली। सीएम नीतीश कुमार ने टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी जिलों की महिलाओं से बातचीत की थी। इस दौरान सीएम ने शराबबंदी के फैसले को क्रियान्वित करने की प्रतिबद्धता दिखाई तो महिलाओं को बल मिला। नारी जीविका महिला ग्राम संगठन व कमल जीविका स्वयं सहायता समूह के बैनर तले महिलाएं एकजुट हुईं। नेतृत्व संभाला बिदांती देवी ने। उन्होंने शराब की चार भट्ठियों को तोड़ दिया। इसके बाद तो महिलाएं शराब के ठेकों पर हाथ में झाड़ू लेकर पहुंच जातीं और शराब पीने वालों को खदेड़ देतीं। यह देख आम महिलाएं भी अभियान से जुड़ती चली गईं। आखिरकार यह अभियान सफल हुआ।

बंदी के बाद भी यहां पर होती है निगरानी

गोपालगंज

बदतर थी गांव की स्थिति

सिरिसियां गांव की स्थिति काफी खराब थी। शराब पीने-पिलाने का खूब जोर था। गांव में ही कई स्थानों पर ठेके चल रहे थे। युवकों में शराब का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा था। शराबी उत्पात भी मचाते। खुद के बीच तो लड़ाई होती ही थी। सड़क पर निकलने वाली बहू-बेटियों पर भी फब्तियां कसा करते थे। तब गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर इस समस्या से निपटने की योजना बनाई। नारी जीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष बिदांती देवी ने इस मामले में पहल करने का निर्णय लिया। उन्होंने बैठक में साफ कहा कि गांव को पूर्ण रूप से शराबमुक्त करने तक हम लड़ते रहेंगे। मुख्यमंत्री की बातों से प्रेरणा मिली। उनके अभियानों का ही असर है कि आज गांव में कोई भी शराब पीकर आने की हिम्मत नहीं करता है।

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