पतरातू में 25 मई को होने वाले नए पावर प्लांट परियोजना के शिलान्यास कार्यक्रम का बहिष्कार करने के लिए विस्थापित परिवार एकजुट हो गए हैं। 1960-70 के दशक में भूमि अधिग्रहण के बाद विस्थापितों ने लगातार आंदोलन कर नौकरी, पुनर्वास और मुआवजा देने की मांग की। लेकिन इन विस्थापित परिवारों को अबतक आश्वासनों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं ं हो पाया है।
इन लोगों ने अपने हक और अधिकार को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी। लेकिन सरकार और प्रबंधन के लोगों ने इनकी मांगों को निरंतर नजरअंदाज कर दिया। बावजूद इसके विस्थापित परिवारों ने संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा। आज भी अपने अधिकार को लेकर आंदोलित हैं। विस्थापितों ने घोषणा कर रखी है कि जबतक उनकी समस्याओं का समाधान नही हो जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
बैठक कर लिया बहिष्कार का निर्णय : सोमवार को विस्थापितों की बैठक हेसला पंचायत भवन में हुई। जिसमें जुटे 25 गांव के विस्थापित प्रतिनिधियों ने निर्णय लिया कि 25 मई को शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान इसी पंचायत के सरना स्थल में बहिष्कार और विरोध की आवाज बुलंद की जाएगी। सभी विस्थापित गांव से हजारों की संख्या में महिला पुरुष जुटेंगे। यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से शांति पूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होगा।
क्या है मुख्य मांगें : विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने मांगे रखी है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का विस्थापितों की संदर्भ में अनुपालन किया जाए। नौकरी, पुनर्वास और मुआवजा दी जाए। पीटीपीएस क्षेत्र में विगत 40-50 वर्षों से रह रहे गरीब तबके के लोगांे को जीविकोपार्जन का साधन उपलब्ध कराते हुए राष्ट्रीय पुनर्वास नीति 2007 के तहत पुनर्वासित की जाए। विस्थापितों को पहचान पत्र निर्गत की जाए। कई अन्य मांगों के साथ विस्थापितों को विश्वास में लेकर पीवीयूएनएल द्वारा प्लांट निर्माण का कार्य किया जाए।
बैठक करते विस्थापित प्रतिनिधि।