इनसो के प्रदेश प्रभारी प्रो. रणधीर सिंह ने कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी किसान की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया। कृषि क्षेत्र में सहूलियत के अभाव में हो रहे घाटे से किसान कर्ज के नीचे दबकर रह गया। जिससे किसान आत्महत्या दर के आंकड़ों में वृद्धि हुई है। प्रो. रणधीर गांव मोहनपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसान को फसल का मुनाफा तो दूर लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा। ऐसे में कृषि घाटे का सौदा बनकर रह गई है। कोई भी किसान नहीं चाहता कि उसके बच्चे कृषि क्षेत्र में आकर उसकी तरह किसान बनें। बैंकों के कर्ज में किसान इस कदर फंस चुका है कि अब जमीन नीलाम होने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचा। दफ्तर में बैठकर बाबूओं द्वारा ऐसी नीतियां बनाई जाती हैं जिससे किसान को कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऐसी शर्तें लागू की गई जिनसे किसान को कोई फायदा नहीं हुआ। आग के नुकसान को फसल बीमा में शामिल नहीं किया गया। 24 घंटे में फसल खराब होने की सूचना किसान को देनी होगी यह शर्त बेमानी है। क्योंकि 24 घंटे बाद तो किसान को खुद पता नहीं चलता कि फसल बचेगी या खराब होगी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को बर्बाद होने से बचाने का केवल एक ही तरीका है कि किसान को कर्ज से मुक्त करके उसे लागत मूल्य पर मुनाफा दिया जाए ।
कृषि का 70 प्रतिशत खर्च डीजल पर आधारित है। इसलिए सरकार को कृषि डीजल पर छूट देनी चाहिए ताकि किसान को ट्रैक्टर वह सिंचाई के लिए सस्ती दर पर डीजल मिल सके। कृषि उपकरणों से जीएसटी हटाई जाए और खेतों को मंडी के रास्तों से जोड़ा जाए। तभी किसान खुशहाल हो सकता है। नई आधुनिक तकनीक को कृषि क्षेत्र में शामिल करके उजड़ती कृषि को बचाया जा सकता है। इस मौके पर रमेश, लाडी, किरण पाल, बलकार, सुनील, संदीप, राजेश, देव व रमेश सहित कई लोग मौजूद थे।