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‘आरटीजीएस-एनएफटी का उपयोग करेंगे तो बैंकों में नहीं लगेगी भीड़’

3 वर्ष पहले
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जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की स्थानीय शाखा में अपनी उपज के लिए उमड़े किसानों को लेन-देन में हो रही परेशानी को लेकर शनिवार को एसडीएम हर्षल पंचोली के निर्देश पर नायब तहसीलदार गजराजसिंह सोलंकी टीम बनाकर पहुंचे। टीम में झाबुआ एसबीआई के एफओएस मनीष त्रिवेदी, ई-गवर्नेंस मैनेजर राजेश पटेल मौजूद थे।

दरअसल, समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में किसानों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। उपज के रुपए लेने के लिए बैंक में रोज बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें रुपए नहीं मिल पा रहे थे। कुछ किसानों का कहना है वे छह दिन से आ रहे हैं तो कुछ ने कहा उन्हें दो-चार हजार रुपए देकर रवाना किया जा रहा है। इस दौरान कुछ किसान आक्रोशित भी हुए। जिन्हें नायब तहसीलदार ने समझाइश दी।

सबसे पहले टीम ने बैंक में पहुंचकर शाखा प्रबंधक कलमे से वास्तविक स्थिति को समझा। इसके बाद बैंक के सभाकक्ष में सभी ग्रामीण किसानों को इकठ्ठा किया गया। जहां नायब तहसीलदार सोलंकी, एफओएस त्रिवेदी और राजेश पटेल ने डिजिटल इंडिया के तहत आरटीजीएस और एनएफटी प्रक्रिया के बारे में किसानों को विस्तृत रूप से समझाया। प्रक्रिया के तहत उन्होंने बताया अगर आरटीजीएस और एनएफटी प्रक्रिया का किसान उपयोग करते हैं तो जो भीड़ बैंक में किसानों की लग रही है वह कम हो जाएगी और किसानों को समय पर भुगतान हो सकेगा। जागरूकता के अभाव में किसान एक ही बैंक में अपनी उपज की राशि लेने के लिए पहुंचता है। लेकिन उसी बैंक से अगर एनएफटी या आरटीजीएस कराकर किसान अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों या कियोस्क बैंक से भी अपनी उपज की राशि प्राप्त कर सकता है। नायब तहसीलदार ने मौके पर कई किसानों की समस्या को हल भी किया और आरटीजीएस और एनएफटी फॉर्म भरकर किसानों को सौंपे।

किसानों को आरटीजीएस और एनएफटी के उपयोग के बारे में बताया गया।

चाहिए 1 करोड़ और मिल रहे 20 लाख प्रति दो दिन

नायब तहसीलदार सोलंकी से चर्चा में शाखा प्रबंधक कलमे ने बताया कैश की कमी के कारण यह दिक्कत आ रही है। बैंक में करीब 4 हजार किसान जुड़े है। प्रतिदिन बैंक को किसानों को देने के लिए 1 करोड़ की राशि चाहिए, लेकिन प्रति दो दिन छोड़कर बैंक को 20 लाख रुपए मिल रहे हैं। जिससे यह समस्या उत्पन्न हो रही है। जैसे ही कैश आता है, वे किसानों के खाते में रुपए जमा कर रहे हैं। इसी के साथ बैंक की जो ट्रांसफर लिमिट है वह कम है। जिससे आरटीजीएस और एनएफटी में बैंक को समस्या आ रही है। नायब तहसीलदार सोलंकी ने बैंक की इस समस्या को वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है।

पानी की समस्या को हल करने के निर्देश दिए

नायब तहसीलदार सोलंकी ने बैंक में पानी की समस्या हल करने के निर्देश शाखा प्रबंधक कलमे को दिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बैंक के बाहर टैंट लगाया जाए, ताकि किसान गर्मी में परेशान न हो।

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