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सब्जियों-फलों में दे रहे खतरनाक दवा, धीमे जहर से लोग अनजान, गंभीर रोगों को न्योता

3 वर्ष पहले
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बाबूलाल राठी/रामविलास जोशी | चौमू/फागी

इन दिनों बाजारों में हरी सब्जी व फलों की भरमार है, परन्तु इनके उत्पादकों द्वारा फसलों को दी जा रही जहरीली दवा से इन्हें खाने वाले लोगों के शरीर में असाध्य रोगों के पनपने की संभावना बढ़ रही है। किसान खेतों में फल व सब्जी की फसलों को बचाने के लिए कई दवा का इस्तेमाल करते है मगर उन्हे पता नहीं होता है कि इन दवाओं का साइड इफैक्ट भी होता है। दूसरी ओर, सब्जी विक्रेताओं द्वारा सब्जियों को लंबे समय तक तरोताजा दिखाने के लिए रंगों, केमिकल्स आदि का उपयोग किया जा रहा है।

कस्बे में कुछ मुनाफाखोर किसान व सब्जी विक्रेता हजारों उपभोक्ताओं की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बाजार से सब्जी ले जाने के बाद घरों में महिलाओं द्वारा धोने पर पानी रंगीन हो रहा है। कुछ फल व सब्जी में तो गंध भी आती है। पालक, भिंडी, टमाटर, खीरा जैसी सब्जियों को कच्चा खाने के शौकीनों को चक्कर आना, जी घबराना, उल्टी दस्त होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उपभोक्ता सलीम जारोली, मनोज कुमावत, रामचरण शर्मा का कहना है कि इन दिनों बाजारों में आ रही सब्जी व फलों में बिल्कुल भी स्वाद नहीं है, लेकिन मजबूरी में इन सब्जियों व फलों को खरीदना पड़ रहा है।

दुष्प्रभाव : हो सकती है कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां

वरिष्ठ चिकित्सक महेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि इस तरह की सब्जियों व फलों को खाने से रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। इसके बचाव के लिए इन सब्जियों व फलों को दो बार साफ पानी में धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। कटी हुई सब्जियों व फलों को ज्यादा देर तक नहीं रखे। वरिष्ठ चिकित्सक सुरेन्द्र कुमार गोयल का कहना है कि ऐसी केमिकलयुक्त सब्जियां व फल खाने से मनुष्य को कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा सांस की बीमारी, अस्थमा रोग, चर्म रोग भी हो सकता है। दवा व केमिकल की सब्जियां व फल काम में लेने से लाेगों के पेट में लीवर, किडनी तक खराब हो सकती है।

फागी. कीटनाशक का प्रयोग करता किसान।

सब्जियों के सेवन में भी खतरा
जैविक खेती ही बेहतर
कृषि अधिकारी मोहनलाल मीणा व सुमन गहलोत का कहना है कि कृषकों को ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती ही करनी चाहिए। जैविक खेती से पैदा होने वाली सब्जियां व नाना प्रकार की फसलों से मनुष्य को किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है। साथ ही देशी बीज व देशी खाद इनमें केंचुए व गोबर खाद अति उत्तम है। इससे पैदावार भी अच्छी होती है और बीमारियां भी नहीं होती है। लोगों का कहना है कि सब्जी व फल उत्पादकों में सरकार द्वारा जैविक खेती करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। जैविक खेती करने पर विशेष जोर देना चाहिए। कृषि विभाग को जैविक खेती के किसानों को फायदे बताए जाने चाहिए।

घरेलू सब्जियों का करें उपयोग

फागी के मुकेश कासलीवाल का कहना है कि घातक बीमारियों को देखते हुए बाजारों की सब्जियों के बजाए लोगों को घरेलू सब्जियां अधिक उपयोग में लेनी चाहिए। इनमें दाल, दानामैथी, राजमा, मंगोडी़, बैसन गट्टे, कढी़, छाछ, दही आदि ज्यादा से ज्यादा ही काम में लेने चाहिए। इससे मनुष्य के शरीर को इन घातक बीमारियों से बचाया जा सके।

बर्तन में पानी का बदल जाता है रंग

उपभोक्ता रानीदेवी का कहना है कि मैं रोजाना बाजार से आने वाली सब्जियों को दो बार धोकर काम में लेती हूं। धोते समय बर्तन में पानी का रंग ही बदल जाता है। शोभा ने बताया कि हमारे परिवार में तो ससुरजी गांवों से आकर बाजारों में सब्जियां बेचने वाले किसानों से ही सीधे खरीद लेते है। ऐसे में केमिकल युक्त सब्जी व फल आदि खाने से बच जाते है।

केमिकल का प्रयोग नहीं करते

रामपाल का कहना है कि हम तो मण्डी से सब्जियां व फल लाकर सीधे बेचते हैं। हम लोग सब्जियाें व फलों में किसी भी प्रकार का केमिकल का उपयोग नहीं करते है।

जनहित में होनी चाहिए जांच

लोगों का कहना है कि सब्जी मंडी में फल एवं सब्जी में खतरनाक केमिकल्स की मात्रा की जांच होनी चाहिए। अधिक केमिकल युक्त फलों व सब्जियों को मंडी में नहीं बिकने देना चाहिए। रीटेलर विक्रेता मंडी से ही फल एवं सब्जी ले जाकर अपनी दुकानों पर बेचते हैं।

लगानी चाहिए रोक

इस समय लोगों में फैल रही नई- नई बीमारियों को देखते हुए सरकार काे फल एवं सब्जियों के उत्पादन में काम में लिए जाने वाले खतरनाक केमिकल्स को बंद करवाना चाहिए, ताकि इससे पनपने वाली बीमारियों से बच सकें।

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