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फलोदी के सरकारी अस्पताल को मिला ब्लड बैंक का लाइसेंस, शीघ्र शुरू होगा

3 वर्ष पहले
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फलोदी क्षेत्र के अलावा आसपास के उन सभी क्षेत्रों के मरीजों व परिवार जनों के लिए सुखद समाचार जो उपचार के लिए फलोदी सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। फलोदी के सरकारी अस्पताल को ब्लड बैंक का संचालन करने के लिए लाइसेंस मिल गया है। उम्मीद है शीघ्र ही ब्लड बैंक शुरू हो जाएगा। ब्लड बैंक शुरू होने पर ऑपरेशन हो सकेंगे और ब्लड के लिए मरीज को रेफर करने की आवश्यकता नहीं होगी। निजी अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों को भी इसका लाभ मिला सकेगा। प्राइवेट अस्पताल भी सरकारी अस्पताल से नियमानुसार ब्लड प्राप्त कर सकेंगे। सरकारी अस्पताल के प्रभारी अधिकारी डॉ. रविन्द्र परमार ने शुक्रवार दोपहर प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी एंड ड्रग कंट्रोलर जयपुर ने लाइसेंस जारी किया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही समारोहपूर्वक ब्लड बैंक शुरू किया जाएगा।

ब्लड बैंक के लिए स्टाफ भी मिला
राज्य सरकार ने जनवरी 18 में ब्लड बैंकों के लिए पदों का सृजन किया था जिसके अनुसार प्रत्येक ब्लड बैंक में मेडिकल आॅफिसर 1, टेक्नीशियन 4, मेडिको सोशल वर्कर 2, लैब अटैन्डेन्ट 4, डाटा एंट्री ऑपरेटर 2, स्टाफ नर्स 1 तथा वार्ड ब्वाय 2 नियुक्त होंगे। फलोदी ब्लड बैंक में अभी मेडिकल अाॅफिसर डॉ. सुनीता सोनी के अलावा रजिस्टर्ड नर्स कंवरलाल डोयल व टेक्नीशियन अशोक कुमार सोनी नियुक्त हैं इसलिए ब्लड बैंक का संचालन शुरू करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

रिक्त पदों पर संविदा कर्मी लगेंगे
डॉ. परमार ने बताया कि इनमें से कुछ पदों पर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति की जा सकेगी। उच्चाधिकारियों को रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आग्रह किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही नियुक्ति हो जाएगी। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में ही मोबाइल पर विधायक पब्बाराम विश्नोई को ब्लड बैंक लाइसेंस मिलने की सूचना दी और रिक्त पदों पर नियुक्ति का आग्रह किया। विश्नोई ने लाइसेंस मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करवाएंगे।

डेढ़ साल लग गया लाइसेंस मिलने में
ब्लड बैंक का भवन डेढ़ साल पूर्व बनकर तैयार हो गया था लेकिन लाइसेंस मिलने में डेढ़ साल का समय लग गया। कभी ब्लड बैंक के लिए डाॅक्टर नहीं होता तो कभी टेक्नीशियन का स्थानांतरण हो जाता। अनेक बार ऐसे अवसर आए जब लगा कि बस अब लाइसेंस मिलने ही वाला है लेकिन इसके उपरांत कोई ना कोई समस्या आ जाती। जब सभी आवश्यक पदों पर नियुक्तियां हो गई तो इसके बाद भी ब्लड बैंक भवन का निरीक्षण करने के लिए टीम आने में ही करीब 6 महीने लग गए। टीम के निरीक्षण करने और पॉजीटिव रिपोर्ट देने के उपरांत भी लाइसेंस मिलने में 4 महीने लग गए।

जनहित में भास्कर अभियान सफल
ब्लड बैंक की लंबे समय से मांग की जा रही थी। ब्लड के अभाव में वहां न तो ऑपरेशन हो पा रहे थे और ना ही हादसे में घायलों की जान बचाई जा रही थी। 140 किमी जोधपुर रेफर करना पड़ रहा था। भास्कर ने इसे प्रमुखता से उठाया।

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