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निर्दलीय 6 गुना बढ़े, लेकिन उनमें से 99% हार जाते हैं

3 वर्ष पहले
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अब तक हुए लोकसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों को लेकर एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है। इसके मुताबिक आम चुनाव लड़ने वाले निर्दलियों की संख्या तो छह गुना बढ़ गई है, लेकिन जीत का आंकड़ा 99% से ज्यादा घट गया है। 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में सबसे ज्यादा 8.7 फीसदी निर्दलियों ने जीत हासिल की थी। पिछले 37 साल में 1% भी नहीं जीते।

37 साल से किसी चुनाव में 1% निर्दलीय भी नहीं जीते

1977 से लेकर 2014 के बीच एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि लोकसभा चुनाव में जीतने वाले निर्दलियों की संख्या 1% भी रही हो। इस दौरान हुए 11 लोकसभा चुनावों में सिर्फ 3 बार महज आधा फीसदी निर्दलियों ने जीत हासिल की। वैसे 1996 में सबसे ज्यादा 10636 निर्दलियों ने चुनाव लड़ा था।

2014 में ये तीन निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे

2014 में सिर्फ 3 निर्दलियों को जीत मिली। इनमें से एक असम और दो केरल से हैं। यह अब तक की दूसरी सबसे कम संख्या है।

संसदीय क्षेत्र सांसद

कोकराझार, असम नाबा कुमार सरणिया (हीरा)

इदुक्की, केरल जोइस जॉर्ज

चालाकुडी, केरल इनोसेंट (एक्टर)

हालांकि 1991 में सिर्फ 1 निर्दलीय जीता था।

स्रोत: चुनाव आयोग, एडीआर, लोकनीति-सीएसडीएस

वर्ष निर्दलीय जीते(%)

1977 1224 0.73

1980 2826 0.31

1984 3791 0.13

1989 3713 0.32

1991 5514 0.01

1996 10636 0.84

1998 1915 0.31

1999 1945 0.30

2004 2385 0.08

2009 3831 0.23

2014 3234 0.92

लोकसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों को लेकर रोचक ट्रेंड
4 बार क्षेत्रीय दलों से ज्यादा वोट शेयर मिला

66 साल में 4 बार निर्दलियों को क्षेत्रीय दलों से ज्यादा वोट मिले। यह ट्रेंड पहले 4 चुनाव तक रहा। जीतने वाले भी 4% से ज्यादा रहे।

वर्ष क्षेत्रीय दल निर्दलीय

1952 8.10% 15.90%

1957 7.60% 19.32%

1962 9.28% 11.05%

1967 9.69% 13.78%

निर्दलियों की जीत हुई थी 1957 में। अब तक की सबसे ज्यादा संख्या।

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निर्दलीय जीता 1991 में। इतिहास में सबसे कम।

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निर्दलीय लोकसभा पहुंचे 2014 में। दूसरी सबसे कम संख्या।

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