जस्टिस चेलमेश्वर ने शनिवार को आवास पर वकीलों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, “मैं मुद्दों और मूल्यों पर खड़ा रहा। जब मुझे लगा कि चीजें गलत दिशा में जा रही हैं, तब मैंने सवाल खड़े किए। मेरा मानना है कि अगर अच्छा हो रहा है तो उसे मंजूर करना चाहिए। अगर कोई बात संदिग्ध है या संदेह है, तो उसकी पड़ताल करना चाहिए। गड़बड़ी मिले तो उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए। अगर कुछ गलत है, तो उसे खत्म करना चाहिए। मैं इसी सिद्धांत को मानता हूं। इसमें निजी हित या किसी की मुखालफत जैसा कुछ नहीं है। यह व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
युवा पीढ़ी का साथ मिला
12 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “युवा पीढ़ी के वकीलों ने न्यायपालिका के लोकतंत्रीकरण के लिए उनका समर्थन किया, तो पुराने वकीलों और सेवानिवृत्त जजों ने हमले किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने सवाल उठा दिए- क्या जज को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए? जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, “मैंने अपने किसी भी फैसले के बचाव के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। पता था कि सार्वजनिक रूप से जब मुंह खोलूंगा तो ये सब बातें कही जाएंगी।’