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करिश्मा: कार के ऊपर पलट गया टैंकर, लेकिन बच गई जान

3 वर्ष पहले
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आगरा के जौनई गांव के रहने वाले बलदेव और उनके बेटे सुदेश ने 2 मई को मौत को बहुत करीब से देखा है। बलदेव सिंह बताते हैं कि वो गांव से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के लिए निकले थे। गांव से डेढ़ से 2 किमी सड़क पर थे तभी तेज तूफान आ गया। उनकी गाड़ी धीमी हो गई। बगल से एक टैंकर जा रहा था। देखते ही देखते टैंकर उनकी कार पर पलट गया। एकदम से तो समझ ही नहीं आया क्या हो गया। अांखों के सामने अंधेरा छा गया। सुदेश चिल्लाने लगा लेकिन कोई हमारी सुनने वाला नहीं था। दबाव की वजह से कार के शीशे टूट गए थे। किसी तरह सामने की तरफ से हम बाहर निकले। काफी देर तक हम सड़क के किनारे दुबके रहे। हम लोगों को काफी चोट आ गई थी। सुदेश का पैर टूट गया था और मेरे सिर पर चोट लगी थी। जब तूफान शांत हुआ तो चोट भूलकर हम गांव में लौटे।

जहां हाहाकार मचा हुआ था। मेरे घर का एक हिस्सा भी ढह गया था। फ़िलहाल हमें चार दिन पहले अस्पताल से छुट्टी मिली है। मुआवजा जो मिला उससे घर का काम शुरू करवाया है।

करिश्मा: मां-भाई...

सीएम योगी भी अपने दौरे पर उससे मिले थे। मानवी नाना नानी के साथ घर लौट आई है। नाना वासुदेव कहते हैं कि 2 साल पहले मेरी बेटी की दहेज़ के कारण बलि इन लोगों ने चढ़ा दी थी, लेकिन हादसे की वजह से हमें उस परिवार की मदद को आगे आना पड़ा। हमारी नातिन मानवी वहां अकेली पड़ गई थी। उसे हम अकेला कैसे छोड़ते। अब वह हमारे साथ ही रहेगी। मानवी के दादा-दादी अभी तिरपाल में रह रहे हैं।

करिश्मा : पेड़ गिरा...

लेकिन इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि नीचे बैठे विक्षिप्त का कुछ नहीं बिगड़ा। उसके सिर से कुछ ऊंचाई पर पेड़ जमीन पर टिक गया। वह अब भी इसी पेड़ के नीचे बैठा रहता है।

प्लास्टिक कैरी बैग...

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2010 को एक नोटिफिकेशन से पिछली सरकार ने राजस्थान को प्लास्टिक कैरी बैग फ्री जोन घोषित किया था। प्लास्टिक बैन की कमान प्रदूषण नियंत्रण मंडल और कलेक्ट्रेट के पास होने से प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

16 बिंदुओं पर...

इसके बाद कमेटी की सिफारिशों के अध्ययन और राजनीतिक एप्रोच के साथ मंथन में पांच से छह महीने का समय लगेगा। इस बीच इस सरकार का कार्यकाल खत्म होगा या आचार संहिता लग जाएगी और गुर्जर आंदोलन नहीं कर पाएंगे। मंत्रिमंडलीय उप समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि 4 जून को राजस्थान सरकार रोहिणी कमेटी के समक्ष अपना प्रजेंटेशन देगी और राजस्थान में ओबीसी की जातियों और जनसंख्या के आंकड़ों से अवगत कराएगी।

कर्नाटक जैसा ड्रामा...

घटनाक्रम को याद करते हुए राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कैलाश मेघवाल बताते हैं-संयुक्त विधायक दल गठित होने के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का सवाल ही नहीं उठता था, लेकिन प्रदेश के राज्यपाल डॉ. संपूर्णानंद ने बहुत ही अप्रत्याशित और लोकतंत्र की हत्या करने वाला कदम उठाया। उन्होंने चार मार्च 1967 को संयुक्त विधायक दल के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। सबसे हैरानीजनक ये था कि कांग्रेस के विरोध में जो संयुक्त विधायक दल बना उसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनसंघ भी शामिल थे। संयुक्त विधायक दल में 48 विधायक स्वतंत्र पार्टी के थे। जनसंघ के 22 विधायक जीतकर आए थे।

जब शेखावत ने मधोक को चेताया : पत्रकार सीताराम झालानी उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, जनसंघ के नेता भैराेसिंह थे। लेकिन जनसंघ के राष्ट्रीय नेता बलराज मधोक ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर दी, जिसके लिए केंद्र की कांग्रेस सरकार तैयार ही बैठी थी। इसे लेकर शेखावत ने मधोक को बहुत बुरा-भला कहा और यहां तक चेताया कि अाइंदा से राजस्थान के मामले में दखल दिया तो ठीक नहीं होगा।

संपूर्णानंद रुखस्त हुए और नए राज्यपाल सरदार हुकुमसिंह आए तो उन्होंने भी वही किया : डॉ. संपूर्णानंद इस बीच राज्यपाल पद से चले गए और उनकी जगह लोकसभा अध्यक्ष रह चुके सरदार हुकुमसिंह को नया राज्यपाल बनाया गया। हुकुमसिंह ने पहले दोनों पक्षों से विधायकों की सूची मंगवाई। इसके बाद दोनों सूचियों में जिन विधायकों का नाम था, उनसे अलग-अलग बातचीत की और सुखाड़िया को सरकार बनाने का न्योता दे दिया।

पुलिस गोलीकांड के लिए बना था बेरी आयोग : मेघवाल बताते हैं कि उस समय पुलिस गाेलीकांड में मारे गए नौ लाेगों और बुरी तरह जख्मी हुए 49 जनों के प्रकरण को लेकर जस्टिस बेरी की अध्यक्षता में एक आयोग बना।

कहर : 150 साल पुराना पीपल उखड़ गया, दब कर हुई मौत

बरखेड़ा निवासी कल्याण सहाय का 27 वर्षीय पुत्र राकेश जांगिड भिवाड़ी में एक फैक्ट्री में काम करता था। साप्ताहिक अवकाश पर 2 मई को घर आया था। शाम को सब्जी लेने अलवर में घंटाघर के पास सब्जी मंडी पहुंचा और हादसे का शिकार हो गया। घटना के बारे में घटनास्थल से कुछ मीटर दूर सब्जी बेच रहे 72 वर्षीय रूपनारायण ने बताया कि तूफान से मंडी में भगदड़ सी मच गई थी। राकेश पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। तभी जबरदस्त तेज हवा के झौके से भारी भरकम पीपल का पेड़ उखड़ गया। राकेश दब गया। वह करीब एक घंटे तक फंसा रहा। काफी मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे से निकाल उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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