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तनु एस., टेक कंसल्टेंट, बेंगलुरू

3 वर्ष पहले
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तनु एस., टेक कंसल्टेंट, बेंगलुरू

दुनियाभर में हो रहे हर 60 ऑनलाइन लेन-देन में से एक पर खतरा मंडरा रहा है। पासकोड का जाना तय है क्योंकि इनसे तमाम समस्याएं जुड़ी हैं। ऑनलाइन लेन-देन करते वक्त एक नई विंडो पॉप होती है, जो असुविधाजनक है। फोन की नई टेक्नोलॉजी ये सब खत्म कर देगी।

à कार्ड कंपनियों ने की तैयारी: कार्ड प्रोवाइडर कंपनी \\\'मास्टरकार्ड\\\' ने घोषणा कर दी है कि 2019 की शुरुआत से उनके यूजर्स को सुविधा दे दी जाएगी कि वे लेन-देन में बायोमेट्रिक ऑथोराइजेशन का विकल्प चुन सकेंगे। यह बड़ा कदम इसलिए है कि तमाम फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस जो मास्टरकार्ड से जुड़ना चाहेंगे उन्हें अपने कस्टमर्स के लिए बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन का इंतजाम करना होगा।

à बदलेगा यूजर एक्सपीरियंस: बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन के एडवांस स्टेज पर पहुंचते ही ऑनलाइन खरीदी का अनुभव एक यूजर के लिहाज से पूरी तरह बदल जाएगा। आज यूजर को एक लेन-देन पूरा करने के लिए तीन से चार पासकोड या ओटीपी से जूझना पड़ता है। इनमें वक्त तो ज्यादा लगता ही है, ट्रांजेक्शन फेल होने की संभावना भी बढ़ती है। जब आप फिंगर प्रिंट सेंसर को छूकर कैमरे को अपने चेहरे की तरफ करके फटाफट सौदा करेंगे या पैसे भेजेंगे तो अलग अनुभव होगा। पासकोड याद रखने और उसको बदलने का झंझट भी नहीं होगा।

à बढ़ेगा बिज़नेस: नेट पर माल बेचने वालों को इस टेक्नोलॉजी से काफी फायदा होने वाला है। चेकआउट प्रोसेस के सुलभ हो जाने से सौदों की संख्या में तगड़ा उछाल आएगा। अभी पेमेंट पहुंचाने की लंबी ऑनलाइन प्रक्रिया में एक भी चीज़ गड़बड़ा जाए तो सौदा रद्द हो जाता है। फिर यूजर अपना मन बदल लेता है और चीज़ बिकते-बिकते रह जाती है। बायोमेट्रिक आइंडेंटिफिकेशन की एडवांस स्टेज से एेसे रद्द होने वाले सौदों की संख्या 85 फीसद तक कम हो जाएगी।

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