प्रियंक भट्ट/नितेश भावसार .बांसवाड़ा | चमगादड़ों का पार्क। सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है। लेकिन कागदी पिकअप वियर पर इन दिनों हजारों की तादाद में चमगादड़ों का बसेरा इस बात को साबित कर रहा है। तादाद इतनी ज्यादा है कि पेड़ों की टहनियों से लेकर बिजली के तारों तक चमगादड़ लटके हुए हैं। पक्षी विशेषज्ञ और वन्यजीव प्रेमी तो इसे संभाग में सर्वाधिक चमगादड़ वाला क्षेत्र होने का भी दावा करते हैं। पक्षी विशेषज्ञ बताते है कि चमगादड़ पहला स्तनपाई जीव है जो उड़ता है। फल इनका मुख्य भोजन है। पानी के नजदीक यह रहना इन्हें पसंद है। यहीं वजह है कि गर्मियों के दिनों हजारों की तादाद में चमगादड़ कागदी पिकअप वियर पर प्रवास करते हैं। स्थानीय वागड़ी बोली में इसे वागोल भी कहते है। हर साल गर्मियों के सीजन में चमगादड़ों का कागदी पार्क पर जमघट लगा रहता है। हर साल इनकी तादाद बढ़ती जा रही है। भरतपुर के पक्षी विज्ञानी डॉ. एसपी मेहरा बताते है कि चमगादड़ों की तादाद में बीते सालों में काफी कमी आई है। उदयपुर के गुलाबबाग, सिरोही में पहले यह काफी संख्या में पाए जाते थे।
उदयपुर व सिरोही में तेजी से घटे, बांसवाड़ा में गर्मी से हो रही लगातार मौतें : इस पार्क में बीते कुछ दिनों से एकाएक कई चमगादड़ दम भी तोड़ रहे हैं। इसके पीछे पक्षी विशेषज्ञ बढ़ता तापमान का असर भी मान रहे हैं। जिले में तापमान 44 डिग्री से ज्यादा तक पहुंच चुका है।