फूप के प्राचीन फोपटी माता मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाचार्य पंडित प्रशांत शास्त्री ने बताया भागवत मुक्ति का पर्याय व जीवन कल्याण का माध्यम है। कथा सुनने से सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। संसार से मोह रखने वाले दुःखी होते हैं। मोह-माया बंधन है, इसका का त्याग करें तो मुक्ति हो सकती है। जो मनुष्य माया के अधीन है वह संसार के बंधन से मुक्त नहीं हो पाता। हम वैराग्य धारण करें, भजन करें व अहम काे त्यागें। तोता पारखी होता है और मीठे फल ही खाता है। शुकदेव मुनि तोते के पर्याय थे। तोते के मुख से भागवत कथा का वाचन हुआ था। जो आत्मा के कल्याण का मार्ग बताए व जीवन जीने के लिए अर्थोपार्जन की कला सिखाए वह गुरु होता है। भक्त का भगवान से गहरा नाता: दूसरी ओर मौ के कटरा मोहल्ला में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास पंडित महावीर दुबे ने बताया पावन कथा जीवन को संवारने पर सुख, समृद्धि, शांति व ईश्वर के प्रति भक्ति भावना को बढ़ाने वाली है। इस कथा में वेद, पुराण, उपनिषद सभी ग्रंथों का सार है। वेद, पुराण, महाभारत आदि की रचना के बाद भी जब शांति का मार्ग नहीं प्रशस्त्र हुआ तो वेद व्यास ने अंतिम कृति श्रीमद्भागवत की रचना की। पहली बाद शुकदेव दास जी राजा परीक्षित को कथा सुनाई थी।