फूप नगर में पहली बार 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन प्राचीन मां फोपटी मंदिर पर किया जा रहा है। महायज्ञ के प्रारंभ से पूर्व आचार्य प्रशांत शास्त्री के सानिध्य में शनिवार सुबह सात बजे मंदिर परिसर से गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा में पीले वस्त्र पहनकर 1008 महिलाओंं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली। कलश यात्रा सदर बाजार से होते हुए हनुमान मंदिर पहुंचीं, जहां से यह यात्रा वापस फोफटी मंदिर परिसर में पहुंची। यात्रा समापन के दौरान आचार्य द्वारा भगवान श्रीकृष्ण का जलाभिषेक किया गया। इस धर्म कार्य में नगर के प्रतिष्ठित मानभावों के साथ साधु-संतों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
महायज्ञ के बाद होगी रासलीला: मंदिर परिसर में समस्त नगर वासियों के सहयोग से प्रारंभ होने जा रहे महायज्ञ का शुभारंभ रविवार सुबह 7 बजे से किया जाएगा। महायज्ञ में हवन की आहुति श्रद्धालुओं द्वारा सुबह 9 बजे तक दी जाएगी। इसके बाद दोपहर बारह बजे तक रासलीला का सुंदर मंचन वृंदावन धाम से आए कलाकारों द्वारा दिखाया जाएगा।
जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ अन्य आध्यात्मिक कथाओं का मंचन कलाकारों के माध्यम से श्रद्धालुओं को कराया जाएगा। रासलीला के समापन के बाद दोपहर 12 बजे श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन शुरू होगा। जिसमें शाम चार बजे तक कथा व्यास प्रशांत शास्त्री के श्रीमुख से श्रोताओं को मोक्ष का मार्ग प्रदत्त कराया जाएगा।
फूप में प्राचीन मां फाेपटी मंदिर पर पहली बार 108 कुंडीय महायज्ञ का हो रहा आयोजन
फूप नगर में कलश यात्रा निकालती महिलाएं।
प्रभु के चरणों में मानव का कल्याण: शास्त्री
दूसरी ओर मौ के कटरा मोहल्ला में चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास महावीर दुबे शास्त्री ने श्रद्धालुओं को बताया भगवान के चरणों में मानव जीवन का कल्याण छुपा हुआ है। जो मनुष्य भगवान को अपरा आराध्य मानकर उन्हें अपना जीवन समर्पित कर देता है, ऐसे लोगों पर प्रभु की नित्य कृपा बरसती है। शास्त्री ने बताया व्यक्ति को जीवन में किसी भी अभिलाशा की चिंता नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इच्छाएं मनुष्य की वह शैली है जो कभी समाप्त नहीं होती है। जिस पेड़ पर फल लगते हैं, वह डाली हमेशा झुकी रहती है, इसलिए हमें अपने सिर को हमेशा प्रभु के चरणों में झुकाकर चलना चाहिए। क्योंकि अहंकारी व्यक्ति का पतन भी मृत्यु की भांति निश्चित होता है।