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- 3 साल पहले की थी बीए, केयू में डीएमसी लेने जाते हैं तो जवाब मिलता है कॉलेज में भेज दी है, कॉलेज वाले बोलते हैं नहीं आई
3 साल पहले की थी बीए, केयू में डीएमसी लेने जाते हैं तो जवाब मिलता है कॉलेज में भेज दी है, कॉलेज वाले बोलते हैं नहीं आई
सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया बनाने की कार्रवाई के चलते बहुत सी जगहों पर आॅनलाइन काम शुरू करवाकर लोगों की दिक्कत दूर करने का दावा कर रही है, वहीं आज भी स्टूडेंट्स को डिग्री के लिए भटकना पड़ रहा है। नीशू धीमान कालका के सरकारी कॉलेज से तीन साल पहले बीए फाइनल कर चुकी है। लेकिन उसे कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से डीएमसी (डिटेल मार्क सर्टिफिकेट) आने का इंतजार है। कालका सरकारी काॅलेज में 2015 को बीए फाइनल पास कर चुकी नीशू धीमान निवासी सूरजपुर ने बताया कि उनके पिता आॅटो चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। हम डीएमसी के लिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के 6 से ज्यादा बार चक्कर लगाकर आए हैं लेकिन वहां पर एक ही जवाब मिलता है कि उन्होंने डीएमसी काॅलेज भेज दी है लेकिन यहां काॅलेज में पता करने पर जवाब मिलता है कि उनके पास नहीं आई है। नीशू ने बताया कि बीए सेकंड ईयर चौथे सेमेस्टर में इंटरनल एसेसमेंट के नंबर नहीं दिए गए थे, जिसके बाद वो अपने हिस्ट्री और हिंदी के टीचर से बायहैंड नंबर लेकर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में देकर आई थी लेकिन इसके बाद भी अभी डीएमसी नहीं आई। डीएमसी न आने से न तो डीग्री मिल रही है, न ही आगे की पढ़ाई कर पा रहे हैं। नीशू ने बताया कि काॅलेज के कई स्टूडेंट्स की डीएमसी नहीं आने से वो आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे।
कालका सरकारी काॅलेज की प्रिंसिपल कुसुम ने इस बारे में कहा कि अगर छात्रा नीशू की डीएमसी काॅलेज में नहीं है तो वह इसके लिए कुरुक्षेत्र लेटर लिखकर मंगवाएंगे। अगर पहले लेटर लिखा जा चुका है तो फिर से लेटर केयू भेजेंगे। प्रिंसिपल कुसुम, कालका सरकारी कॉलेज