पिपरई| पवित्र माह रमजान का पहला रहमत का असरा अब आखरी दौर में है। दसवें रोजे पर यह असरा समाप्त होगा। इसके बाद दूसरा असरा मगफिरत का शुरू होगा।
रोजा सब्र और रहम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सलीके और तरीके से रखे गए रोजे का दिल है सब्र तथा इस दिल की धड़कन है रहम। सब्र का सबूत है रोजा। रहम का दूत है रोजा। माह ए रमजान रुहानियत का का स्कूल है और रोजेदार इस स्कूल के स्टूडेंट हैं। यह बात जामा मस्जिद के मुफ्ती आमिर कासमी ने छठे रोजे का महत्व बताते हुए कही। श्री कासमी ने कहा कि सब्र के स्लैट पर रहम का लफ्ज है रोजा।
मायने से देखे तो सब्र का मतलब है धीरज या धैर्य। रहम का मतलब है दया। धैर्य और दया की बात हर धर्म में कही गई है। इस्लाम धर्म में भी सब्र और रहम की अहमियत का जिक्र स्पष्ट तोर पर आया है। इसलिए सब्र रहम को रोजे की अजमत और जीनत कहा जाता है।