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रोजे की हिफाजत करो,वह तुम्हारी करेगा

3 वर्ष पहले
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रमजान का पवित्र माह गर्मी में शुरू हुआ है। भीषण गर्मी में जहां तापमान 44 से 45 डिग्री के आसपास चल रहा है। भीषण गर्मी के कारण भी रोजेदारों का उत्साह कम नहीं हो पा रहा है। भीषण गर्मी के मौसम में बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में रोजे रखकर रहे हैं।

जामा मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद आमिर कासमी ने चौथे रोजे का महत्व बताते हुए कहा कि रमजान में जैसे छाता बारिश से हिफाजत करता हे, साफा, पगड़ी, हैट, रूमाल धूप से बचाता है, स्वेटर, शाल, कंबल, कोट सर्दी से रक्षा करता है। हेलमेट एक्सीडेंट में सिर की हिफाजत करता है। वैसे ही रोजा (उपवास) रोजेदार की हिफाजत करता है। शर्त यह है कि रोजा सलीके और तरीके से रखा जाए। रोजे का सलीका है सब्र, संयम और सदाचार। रोजे का तरीका है तोहिद, ईमानदारी और मधुर व्यवहार। इस सलीके और तरीके से जब रोजा रखा जाता है तो ऐसा रोजा खुद रोजेदार की हिफाजत करता है। रोजे की हिफाजत करो रोजा तुम्हारी हिफाजत करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि रोजा रखने के दौरान बुराइयों से बचो तो रोजा एक ऐसी रूहानी ताकत बन जाएगा कि रोजेदार को खुद ब खुद बुराइयों से बचाकर हिफाजत करेगा। खुलासा यह है कि हफीज (रझित) हाफिज(रझक) हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रोजे की इज्जत करो रोज़ा तुम्हारी इज्जत करेगा। सलीके और तरीके से रखा गया रोजा दरअसल बुलेटप्रूफ की तरह है जो बुराइयों के बुलेट से हिफ़ाजत करता है। रोज़ा अल्लाह से रोजेदार की मगफिरत (मोझ) के लिए सिफारिश भी करता है। यहां यह भी समझना जरूरी है कि सिर्फ रोजे के दौरान ही नहीं बल्कि हर दिन हर पल बुराई से बचना चाहिए। रोजा बुराई से बचने की ट्रेनिंग है। जिस पर जिंदगीभर अमल करना चाहिए। पवित्र कुरआन में जिक्र है, ईमान पर रहो और नेक अम्ल करो।

धर्म

जामा मस्जिद में मुफ्ती मो.आमिर कासमी ने कहा

मस्जिद में नमाज पढ़ते रोजेदार।

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