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बांसवाड़ा में यूनानी पद्धति से एक माह में बिना ऑपरेशन दवाओं से निकाली अंडाशय से गांठ
बांसवाड़ा| मुझे पिछले करीब डेढ़ साल से पेट में दर्द और अन्य परेशानियां उठानी पड़ी। इसके लिए कभी कभार छोटा मोटा इलाज किया जाता रहा। जब यह तकलीफ कम नहीं होती दिखने पर मेरे बेटे ने सोनोग्राफी करने की सलाह दी। 15 मार्च को जब सोनाग्राफी रिपोर्ट आई तो इसे देखते ही डर गई। क्योंकि इसमें अंडाशय में गांठ (सिस्ट) था। क्याेंकि इसमें ऑपरेशन कराने की पूरी संभावना थी। पहले ही दो सिजेरियन होने से अब नहीं चाहती थी कि तीसरा ऑपरेशन फिर से हो। आखिर में जब महात्मा गांधी अस्पताल में कार्यरत यूनानी डॉक्टर जहांआरा को रिपोर्ट दिखाई और परेशानी बताई तो उन्होंने यूनानी पद्धति से सिस्ट निकालने का भरोसा दिलाया। एक माह में दवाईयों के माध्यम से सिस्ट निकल गई। जैसा पीड़िता ने भास्कर अपने अनुभव बताए।
यूं चला इलाज, सोनोग्राफी से पुष्टि
डॉ. जहांआरा ने बताया कि पीड़ित महिला का उसी दिन से इस पद्धति से इलाज शुरू कर दिया। पीड़िता को 1 माह की दवाई माजुन, दबिबुल वर्द, अर्कमको, हस्बे, करंजवा दवाइयां दी गई। इन दवा की जितनी मात्रा बताई गई उसे एक माह तक नियमित लिया गया। पीड़िता ने बताया कि उपचार तो कर रहे थे लेकिन बीच में यह ख्याल भी आ रहा था कि छुट्टियां होने पर बाहर जाकर बता आए। इसके लिए फिर से सोनोग्राफी कराई तो उसमें सिस्ट पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी। मरीज ने बताया कि पहली सोनोग्राफी में करीब 67 गुणा 46 एमएम की सिस्ट थी। ओवेरियन सिस्ट महिलाओं में एक बढती हुई समस्या है। ओवरी महिला प्रजनन प्रणाली का हिस्सा हैं। वे गर्भाशय के दोनों तरफ निचले तरफ स्थित हैं। महिलाओं के दो ओवरी होते हैं जो अंडे और साथ ही हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन करते हैं। कभी-कभी, किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली जिसे सिस्ट कहा जाता है वो उत्पन्न हो जाती है। सिस्ट के कारण पेट में सूजन, पैल्विक दर्द, पीठ के निचले हिस्से या जांघों में दर्द, मतली और उल्टी की समस्याएं होती हैं। डॉ. जहांआरा ने बताया युनानी पद्धति से ऑवेरियन सिस्ट को निकालने की यह बांसवाड़ा जिले में पहला मामला है।
इन रोगों को भी आसानी से दूर किया जा सकता
डॉक्टर ने बताया कि यूनानी उपचार के माध्यम से स्कीन डिजीज, जोड़ों का दर्द, एलर्जी, बालों का झड़ना, पेरालाइसिस के शुरुआती दौर में सफलता, नर्व सिस्टम, गठिया रोग, सफेद पानी, सफेद दाग जैसे रोग आसानी से दूर किए जा सकते हैं। बशर्त मरीज को ट्रीटमेंट पूरा लेना होगा।
बाद की सोनोग्राफी रिपेार्ट जिसमें सिस्ट समाप्त हो गया।