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मुआवजा दिलाने के मामले में फरार पटवारी ने किया सरेंडर

3 वर्ष पहले
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शासकीय भूमि की हेराफेरी कर लाखों का मुआवजा दिलाने के मामले में फरार पटवारी करण चंद्राकर ने शुक्रवार को पिथौरा न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। जिसे न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।

उक्त पटवारी के विरुद्ध पिथौरा पुलिस के द्वारा शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना व हेराफेरी का आरोप लगाते हुए फरारी में चालान पेश किया था। जिस पर न्यायालय ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार आरंग सराईपाली सेक्शन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में शासन द्वारा किसानों के भूमि का अर्जन कर उसका मुआवजा राशि दिया गया है।

ग्राम लहरौद में भी भूअर्जन की कार्रवाई हुई थी, जहां पर शासकीय भूमि को हेराफेरी करते हुए खेमिनबाई के नाम से वर्ष 2011 में रिकार्ड दुरूस्त कर दिया गया था और महिला के नाम से भू-अर्जन की कार्रवाई हो गई। इसके बाद महिला खेमिनबाई के नाम से लगभग 8 लाख रुपए का मुआवजा भी स्वीकृत हो गया। उक्त राशि को कुछ लोगों ने गड़बड़ी करते हुए खुद रख लिया।तब खेमिनबाई ने इसकी उच्च स्तरीय शिकायत की थी जिस पर एसडीएम पिथौरा व एसडीओपी के द्वारा सूक्ष्मता से जांच करने पर आरोपी पटवारी करण चंद्राकर सहित अन्य लोगों को दोषी पाया था।

थाना पिथौरा में आरोपीगणों के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी भादवि के तहत अपराध दर्ज करते हुए अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। उक्त मामले में आरोपी करण चंद्राकर की भूमिका महत्वपूर्ण थी। पिथौरा पुलिस उसे पकड़ने का भरसक प्रयास किया गया था, इसके बाद पुलिस ने उसे फरार घोषित करते हुए न्यायालय में चालान पेश किया, जिस पर पिथौरा न्यायालय के द्वारा करण चंद्राकर के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए पटवारी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया और न्यायालय के द्वारा उसे जेल भेज दिया गया। ज्ञात हो कि उक्त मामले में तत्कालीन हल्का पटवारी बेंजामिन सिक्का की भी गिरफ्तारी हुई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।

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