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सीए से मिल साध्वी के दर्शन को मुंबई से बुरहानपुर जा रहे थे सभापति, परिवार वाले बोले-किसी से दुश्मनी नहीं है

3 वर्ष पहले
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सभापति कमलेश डोसी को तलाशने के लिए प्रतापगढ़ से पहुंची पुलिस की दो टीमों और साइबर सेल की टीम शनिवार रात तक कोई सुराग नहीं लगा पाई। शेयर ब्रोकिंग और व्यापार के सिलसिले में डोसी महीने में एक-दो बार मुंबई जाते रहते थे। परिवार वालों का कहना है कि वे इस बार अपने साथ एंड्रॉयड फोन नहीं ले गए। उनके पास साधारण मोबाइल फोन ही है। मोबाइल गुरुवार रात से ही स्विच ऑफ आ रहा है। ऐसे में साइबर सेल को उनकी लोकेशन तलाशने में परेशानी हो रही है। इधर, पुलिस और परिवार के लोगों ने किसी से दुश्मनी और कहासुनी होने जैसे संभावना से इनकार किया है। सभापति को तलाशने के लिए उनके भाई अंकित डोसी, शरद, अनूप, सौरभ डोसी व वर्सित लोढ़ा मुंबई गए हैं। हादसे की आशंका को देखते हुए परिजनों ने उनकी अंतिम लोकेशन के आधार पर मुंबई के चैंबूर क्षेत्र के सभी अस्पतालों में जांच की, लेकिन कहीं भी सुराग हाथ नहीं लगा। होटल छोड़ने के दौरान भी सीसीटीवी फुटेज में उनके पास साधारण फोन ही नजर आ रहा है। उनके पास दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन हैं, जिन्हें वे प्रतापगढ़ ही छोड़कर गए हैं।

दो स्मार्ट फोन रखते हैं, लेकिन इस बार साधारण फोन ले गए थे

प्रतापगढ़। सभापति के लापता होने पर उनके निवास पर कुशलक्षेम पूछने पहुंचे लोग (बाएं), मुंबई में होटल से निकलते वक्त का सीसीटीवी फुटेज।

रात 11.30 बजे वाली ट्रेन में बुरहानपुर जाना था, स्टेशन से ही लापता हो गए

मुंबई में सीए का काम निपटाकर डोसी ने बुरहानपुर में जैन साध्वी के दर्शन करने जाने की बात परिवार वालों से कही थी। बुरहानपुर जाने के लिए रात 11.30 बजे ट्रेन थी। वे रात 8 बजे होटल से चेक आउट कर 10.45 बजे लोकमान्य तिलक रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन इसके बाद से उनका परिजनों के साथ संपर्क नहीं हुआ है। इस पर परिजनों ने बुरहानपुर में जैन संतों के यहां भी पता किया, लेकिन उनके वहां नहीं पहुंचने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने शुक्रवार देर रात प्रतापगढ़ कोतवाली में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

लॉटरी से जीतकर बने हैं परिषद के पहले सभापति

कमलेश डोसी प्रतापगढ़ नगर पालिका के नगर परिषद बनने के बाद पहले सभापति हैं। इससे पूर्व डोसी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बतौर अध्यक्ष लगातार यह उनका दूसरा कार्यकाल है। इस कार्यकाल में डोसी लॉटरी से जीतकर सभापति बने थे। जनजाति एवं क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा उन्हें राजनीति में लेकर आए। उनका पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा हुआ है। बड़े पिता शांतिलाल डोसी उर्फ गोपी वाइस चेयरमैन रह चुके हैं। उनकी मां भी पार्षद रह चुकी है। 2005 में नगर पालिका का चुनाव लड़कर नेता प्रतिपक्ष बने थे। इसके बाद पालिकाध्यक्ष के सीधे मुकाबले में ओमप्रकाश ओझा को हराकर पालिकाध्यक्ष बने थे। इसी दौरान प्रतापगढ़ नगर पालिका के नगर परिषद बनने पर सभापति बने हैं।

जयपुर तक साथ गए पूर्व पार्षद ने बताया, मुझे जयपुर से ही लौट जाने को कहा

सभापति डोसी के साथ जयपुर तक गए पूर्व पार्षद सुरेश मालवीय ने भास्कर को बताया कि दोनों बुधवार सुबह 11.30 बजे प्रतापगढ़ से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में दोनों में राजनीति के साथ ही विभिन्न विषयों पर चर्चा होती रही। उन्होंने प्रज्ञाश्री महाराज के दर्शन के लिए जाने की भी बात कही थी। इसके लिए सुबह 10 बजे टिकट भी बुक कराया था। शाम 5 बजे वे जयपुर पहुंच गए थे। गुरुवार सुबह 8 बजे की फ्लाइट होने के चलते डोसी ने उन्हें 5 बजे उठा दिया था। यहां से दाेनों 6.15 बजे एयरपोर्ट पहुंचे। सभापति ने उन्हें पहले तो जयपुर में ही रुकने की बात कही, लेकिन बाद में प्रतापगढ़ निकलने को कहा तो मालवीय 9 बजे प्रतापगढ़ के लिए रवाना हो गए। दोपहर एक बजे मुंबई एयरपोर्ट से उनसे बातचीत हुई थी।

स्टेशन जाते वक्त रास्ते में पाव भाजी खाई: बुरहानपुर जाने के लिए होटल से सभापति डोसी टैक्सी से रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए। इस दौरान उन्होंने रास्ते में टैक्सी रुकवाकर पावभाजी खाई। यहां से वे रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद से उनका किसी से संपर्क नहीं हो पाया है।

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