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जिला अस्पताल में बैड पूरे नहीं, किराए पर ला रहे तामीरदार, जमीन पर हो रहा इलाज

3 वर्ष पहले
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अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो इसके लिए राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाएं चलाई हैं, लेकिन प्रतापगढ़ के जिला अस्पताल के हालात कुछ और ही हैं। मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के नाम पर बेड के अभाव में जमीन पर लेट कर उपचार कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के बिलकिस बाई वार्ड में कई मरीज जमीन पर ही अपना इलाज करवाने को मजबूर हैं। दूरदराज के ग्रामीण अंचल से आने वाले मरीज जमीन पर बिछाने के लिए कोई साधन नहीं होने के कारण बाजार से किराए पर बिस्तर लाकर अपना उपचार करवा रहे हैं। इससे मरीजों के परिजनों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते जिला अस्पताल में इन दिनों उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।

जिला अस्पताल के बिलकिस बाई मेमोरियल वार्ड में 3 कूलर लगे हुए हैं लेकिन मरीजों को इनकी हवा नहीं मिल पा रही है। तीन कूलर में से एक कूलर बंद पड़ा हुआ है वहीं दो कूलर नर्सिंग स्टाफ को राहत प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी में पंखे भी कुछ खास राहत नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।

बुधवार को वार्ड में 51 मरीज भर्ती थे। बेड कम होने के कारण कुछ को नीचे सुलाना पड़ा। कुछ समय बाद मरीजों को पास के बर्न वार्ड में खाली पड़े बेड पर शिफ्ट कर दिया गया। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्थाई तौर पर गैलरी में 10 बैड लगाकर व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही 10 गद्दे भी अतिरिक्त रखे जा रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वार्ड का एक्सटेंशन किया जाएगा। डॉ. राधेश्याम कच्छावा, पीएमओ, जिला अस्पताल, प्रतापगढ़

रणजीत सिंह -प्रतापगढ़, नई आबादी

प्रतापगढ़ के नई आबादी से आए रणजीत सिंह भाटी ने बताया कि उनकी प|ी आशा को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर बुधवार सुबह 9 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने उन्हें वार्ड में भर्ती कर लिया, लेकिन वार्ड में बेड खाली नहीं होने पर उन्हें जमीन पर ही लेटना पड़ा। स्टाफ से बिछाने के लिए चद्दर मांगने पर उन्होंने बाहर से बिस्तर लाने की बात कही। इसका विरोध करने पर कुछ देर बाद एक बेड खाली होने पर उन्हें वहां शिफ्ट कर दिया गया। इस दौरान उनकी प|ी को बैठे-बैठे ही ड्रिप चढ़ाई गई।

दशरथ - गांव लापरिया रुंडी

विषाक्त वस्तु का सेवन करने से अचेत हुए लापरिया रुंडी निवासी मदनलाल को लेकर आए उसके पिता दशरथ ने बताया कि मंगलवार रात को पुत्र की हालत गंभीर होने पर उसे जिला चिकित्सालय लेकर आए थे। यहां बेड खाली नहीं होने पर जमीन पर ही उसका उपचार शुरू कर दिया गया। दूसरे दिन भी बेड नहीं मिला, इसके कारण उनसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतापगढ़। वार्ड में जमीन पर लेटे मरीज।

परेशानी : मरीजों की जुबानी

गोवर्धन लाल -गांव अमलावद

निकटवर्ती गांव अमलावद से अपनी प|ी का उपचार कराने आए गोवर्धन लाल ने बताया कि उल्टी दस्त की परेशानी के चलते तीन दिन पहले अपनी प|ी रेखा को लेकर जिला अस्पताल आए थे। यहां बेड खाली नहीं होने के कारण वार्ड में चद्दर पर ही सुला कर उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार शाम को भी खाने की व्यवस्था नहीं होने पर उन्हें होटल से खाना लाकर खाना पड़ा था।

इकबाल -गांव घोटारसी

घोटारसी से अपनी प|ी हुसैना का इलाज कराने आए इकबाल ने बताया कि उनकी प|ी को चक्कर और सरदर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल लेकर आया। डॉक्टर ने यहां भर्ती कर दिया। वार्ड में बेड नहीं होने के कारण जमीन पर सुला रखा है। ड्रिप भी यहीं लगाई जा रही है।

रणजीत सिंह -प्रतापगढ़, नई आबादी

प्रतापगढ़ के नई आबादी से आए रणजीत सिंह भाटी ने बताया कि उनकी प|ी आशा को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर बुधवार सुबह 9 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने उन्हें वार्ड में भर्ती कर लिया, लेकिन वार्ड में बेड खाली नहीं होने पर उन्हें जमीन पर ही लेटना पड़ा। स्टाफ से बिछाने के लिए चद्दर मांगने पर उन्होंने बाहर से बिस्तर लाने की बात कही। इसका विरोध करने पर कुछ देर बाद एक बेड खाली होने पर उन्हें वहां शिफ्ट कर दिया गया। इस दौरान उनकी प|ी को बैठे-बैठे ही ड्रिप चढ़ाई गई।

दशरथ - गांव लापरिया रुंडी

विषाक्त वस्तु का सेवन करने से अचेत हुए लापरिया रुंडी निवासी मदनलाल को लेकर आए उसके पिता दशरथ ने बताया कि मंगलवार रात को पुत्र की हालत गंभीर होने पर उसे जिला चिकित्सालय लेकर आए थे। यहां बेड खाली नहीं होने पर जमीन पर ही उसका उपचार शुरू कर दिया गया। दूसरे दिन भी बेड नहीं मिला, इसके कारण उनसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लीला मीणा - गांव नायन

पीपलखूंट उपखंड के नायन गांव से आई लीला मीणा ने बताया कि वह अपने पिता नारायण की तबीयत खराब होने पर मंगलवार को जिला अस्पताल लेकर आई, लेकिन बेड खाली नहीं होने की वजह से जमीन पर ही उनका उपचार किया जा रहा है। बिस्तर नहीं होने के कारण बाजार से बिस्तर लेकर आने पड़े। जिसके कारण रोजाना 10 रुपए किराया देना पड़ रहा है।

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