भास्कर संवाददाता | प्रेमनगर
प्रेमनगर को ओडीएफ ब्लॉक तो घोषित कर दिया गया है लेकिन आज भी लोगों को टॉयलेट करने बाहर जाना पड़ता है। ब्लॉक को ओडीएफ घोषित कर बाहवाही लूटने के चक्कर में सभी पंचायतों में ठेकेदारों द्वारा ऐसे टॉयलेट बनाए गए जिसका कोई उपयोग नहीं है। क्षेत्र में 60 फीसदी टॉयलेट अधूरे हैं।
यहीं कारण है कि लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम पंचायत महेशपुर है जहां अाधे-अधूरे टॉयलेट के कारण ज्यादातर लोगों जंगलों में खतरा उठाकर शौच के लिए जाना पड़ता है। गौरतलब है कि स्वच्छता अभियान के तहत टॉयलेट निर्माण के लिए ग्राम पंचायत को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कमाई के चक्कर में निर्माण एजेंसी द्वारा इसका निर्माण ठेके पर दे दिया गया। इससे टॉयलेट मनमाने तरीके से बना दिए गए। घटिया स्तर की सामग्री का प्रयोग कर निर्माण करा दिया गया। बनने के कुछ ही दिनों में शौचालयों के दरवाजे व टंकी टूट चुके हैं।
इसके बाद भी निर्माण एंजेसी द्वारा इसे सुधारने पहल नहीं की गई है। विकासखंड का ग्राम पंचायत महेशपुर जो चारों ओर घने जंगलो से घिरा हुआ है, यहां के लोगों को जंगलों में शौच करने जाना पड़ता है। ऐसे में उन पर जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा बना रहता है। गाैरतलब है कि ग्राम महेशपुर में स्वच्छता अभियान के तहत लगभग एक हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसमेंे लगभग 80 प्रतिशत शौचालयों में दरवाजे एवं टंकी गायब है। गुणवत्ताविहीन निर्माण कराए जाने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा जनप्रतिनिधियों को किए जाने के बाद भी शौचालयों की मरम्मत का काम नहीं कराया गया। शासन की महत्वाकांक्षी योजना का का लाभ लोगोंे को नही मिल पा रहा है।
मनमाने निर्माण के कारण कई टायलेट किसी काम के नहीं
भास्कर संवाददाता | प्रेमनगर
प्रेमनगर को ओडीएफ ब्लॉक तो घोषित कर दिया गया है लेकिन आज भी लोगों को टॉयलेट करने बाहर जाना पड़ता है। ब्लॉक को ओडीएफ घोषित कर बाहवाही लूटने के चक्कर में सभी पंचायतों में ठेकेदारों द्वारा ऐसे टॉयलेट बनाए गए जिसका कोई उपयोग नहीं है। क्षेत्र में 60 फीसदी टॉयलेट अधूरे हैं।
यहीं कारण है कि लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम पंचायत महेशपुर है जहां अाधे-अधूरे टॉयलेट के कारण ज्यादातर लोगों जंगलों में खतरा उठाकर शौच के लिए जाना पड़ता है। गौरतलब है कि स्वच्छता अभियान के तहत टॉयलेट निर्माण के लिए ग्राम पंचायत को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कमाई के चक्कर में निर्माण एजेंसी द्वारा इसका निर्माण ठेके पर दे दिया गया। इससे टॉयलेट मनमाने तरीके से बना दिए गए। घटिया स्तर की सामग्री का प्रयोग कर निर्माण करा दिया गया। बनने के कुछ ही दिनों में शौचालयों के दरवाजे व टंकी टूट चुके हैं।
इसके बाद भी निर्माण एंजेसी द्वारा इसे सुधारने पहल नहीं की गई है। विकासखंड का ग्राम पंचायत महेशपुर जो चारों ओर घने जंगलो से घिरा हुआ है, यहां के लोगों को जंगलों में शौच करने जाना पड़ता है। ऐसे में उन पर जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा बना रहता है। गाैरतलब है कि ग्राम महेशपुर में स्वच्छता अभियान के तहत लगभग एक हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसमेंे लगभग 80 प्रतिशत शौचालयों में दरवाजे एवं टंकी गायब है। गुणवत्ताविहीन निर्माण कराए जाने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा जनप्रतिनिधियों को किए जाने के बाद भी शौचालयों की मरम्मत का काम नहीं कराया गया। शासन की महत्वाकांक्षी योजना का का लाभ लोगोंे को नही मिल पा रहा है।
पंचायत को ओडीएफ घोषित करने के बाद यहां खुले में शौच करते पकड़े जाने पर 50 से पांच सौ रुपए का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। इस डर से यहां के लोग अंधेरे में टॉयलेट करने जंगल जाने विवश हैं। वहां जंगली जानवरों का भय बना रहता है। आधे-अधूरे टॉयलेट के कारण महिलाएं भी परेशानी में हैं।
जुर्माने का डर, अंधेरे में खुले में टॉयलेट जाने मजबूर हैं ग्रामीण