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छात्राओं को बांटी पंचर साइकिलें; नाेजल भी नहीं, धूप में पैदल चलकर ले जाना पड़ा

3 वर्ष पहले
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नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है, शिक्षा विभाग अभी पिछले सत्र की साइकिलें बांटने में जुटा है। शनिवार को आसपास के गांवों से करीब 30 छात्राओं को आनन-फानन में बीआरसी भवन बुलाकर साइकिलें दी गईं। साइकिलों के पहियों में नाजल नहीं लगाया गया और न ही टायरों में हवा भरी गई। दूर-दराज से आई छात्राओं को तपती तेज धूप में पैदल ही साइकिल को ले जाना पड़ा।

दूरदराज रहने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने के एक साल पहले साइकिलें बंाटी जानी थी।, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब शिक्षण सत्र खत्म हो गया तो साइकिलें बांटने जाने लगी। परीक्षाएं होने से छात्र-छात्राओं ने स्कूल आना बंद कर दिया है। अब शिक्षक घर-घर से छात्राओं को बुलाकर साइकिल बांट रहे है। मिडिल और हाई स्कूल में पढ़ने वाले विद्याथियों को शासन की ओर से नि:शुल्क साइकिलों को वितरण किया जाना था, लेकिन अब तक जिले भर के छात्रों तक साइकिल नहीं पहुंच सकी।

साइकिलों का वितरण न होने से विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए पैदल सेंटर ही जाना पड़ा। नियमानुसार यह साइकिलें शिक्षण सत्र शुरू होते ही मुख्यालय पर पहुंचनी थी, लेकिन पूरा शिक्षा सत्र बीत जाने के बाद भी छात्र-छात्राओं को साइकिलें वितरण नहीं की गई। साइकिल न मिलने के कारण छात्र-छात्राओं को साल भर 3 से 5 किमी पैदल चलकर स्कूल पढ़ने जाना पड़ा।

टीकमगढ़। बीआरसी भवन से साइकिल लेकर पैदल जाती छात्राएं।

माॅडल स्कूल एक साथ हुई तैयार साइकिलें

पुराने शिक्षण सत्र की साइकिलें बड़ौरा घाट के स्थित मॉडल स्कूल में साइकिल को कसा गया था। जिसके बाद स्कूलों तक पहुंचाई गई। जहां से गर्मी के मौसम में घर-घर से छात्रों को बुलाकर साइकिल वितरण कर रहे है, साइकिल पूर्ण रूप से तैयार नहीं है।

साइकिल में नहीं है

नोजल, कैसे चलाए

शुक्रवार को भगतनगर कालाेनी स्थित बीआरसी भवन से साइकिलें वितरण की गई। छात्राओं ने बताया कि शासन से साइकिल तो मिल गई, लेकिन साइकिलों के टायर में न तो नोजल है और न ही हवा। जिससे सभी छात्राओं को साइकिल लेकर पैदल अपने घर जाना पड़ा।

डीपीसी हरिश्चंद्र दुबे का कहना है कि पृथ्वीपुर से साइकिल मंगवाकर छात्राओं को बांटी गई। जिससे यह समस्या आ गई होगी। अगर साइकिल कंप्लीट नहीं है तो उसे ठीक करवा दिया जाएगा।

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