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संतुष्ट नहीं होने पर आती है दरिद्रता

3 वर्ष पहले
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श्री ब्रह्म पुष्कर गौशाला समिति के तत्वावधान में सांई बाबा गार्डन में चल रही एक कथा गौ माता के नाम श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह शुक्रवार को भागवत पुराण की शोभायात्रा व सम्मान समारोह के साथ संपन्न हुई।

शुक्रवार को कथा व्यास पर विराजित पं. रूपचंद पाराशर ने कहा कि मनुष्य को सोच समझकर बोलना चाहिए। दरिद्रता तब आती है जब व्यक्ति संतुष्ट नहीं होता है। सुदामा सबसे संतुष्ट व्यक्ति था। कभी किसी का हिस्सा नहीं लेना चाहिए अन्यथा सुदामा जैसी दशा होती है। मनुष्य को सागर की तरह गंभीर रहना चाहिए, शांत चित्त रहना चाहिए। आसक्ति नहीं रखनी चाहिए। मनुष्य को भंवरे की तरह होना चाहिए जो पुष्प से अच्छी वस्तु लेता है और गंदगी वहीं छोड़ देता है। इस अवसर पर कथावाचक पाराशर के साथ पुष्कर के गायक कलाकार दीनदयाल पाराशर, दिनेश पाराशर, आमोद दाधीच, विनोद दाधीच, गौरीशंकर वैष्णव एवं अश्विनी कुमार पार्टी ने एक से बढ़कर एक भजन गाए। उन्होंने गोसेवा का करने का आह्वान किया।

प्रवक्ता हेमंत रायता ने बताया कि कथा के समापन के अवसर पर शुक्रवार को ब्राह्मण विद्यार्थियों के द्वारा हवन यज्ञ किया गया तथा शाम को बैंड बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। कथा आयोजन में सहयोग करने पर पूर्व पालिकाध्यक्ष सूरज नारायण शर्मा, अरूण बाबू पाराशर, जयकुमार पाराशर, सोनू पाराशर, गोविंद पाराशर, हेमंत रायता, मोनू रायता, गिरिराज, मोनू पाराशर, सोनू, राहुल पाराशर, विष्णुप्रसाद नागौरी, नेहरू पंडित, गोपाल पाठक, उमेश बोहरा, वासुदेव पाराशर, लाला राजगुरु आदि का कथा वाचक ने माला व शॉल पहनाकर सम्मान किया।

भागवत पुराण की शोभायात्रा के साथ कथा का समापन
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु।

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