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जिनका कोई नहीं, ऐसे 23 जनों की अस्थियां विसर्जित

3 वर्ष पहले
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास अपनों के लिए भी समय नहीं है। वहीं दूसरी ओर गुजरात के सूरत शहर में अग्निदाह सेवा केंद्र नामक संस्था ने अज्ञात व्यक्तियों के शवों का अंतिम संस्कार करने का बीड़ा अपने हाथ में ले रखा है।

संस्था के प्रतिनिधि लावारिस शवों का न केवल परंपरानुसार अंतिम संस्कार करते हैं, बल्कि अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए उनकी अस्थियों को बड़े-बड़े तीर्थ स्थलों में ले जाकर वैदिक मंत्रोचारण के बीच प्रवाहित भी करते हैं।

हरिद्वार एवं सोमनाथ में भी करते हैं अस्थियों का विसर्जन

शुक्रवार को सूरत की अग्निदाह सेवा केंद्र संस्था के अध्यक्ष वेनिलाल रसिकलाल मरवाला 23 अज्ञात मृत लोगों की अस्थियां लेकर पुष्कर पहुंचे तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने तीर्थ पुरोहित दिनेश (मोनू) रायता के सानिध्य में अस्थियां सरोवर में विसर्जित की। साथ ही सामूहिक रूप से पिंडदान व तर्पण कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए कामना की।

पुष्कर सरोवर में अस्थियां विसर्जन करते संस्था के अध्यक्ष मरवाला।

यज्ञ भी करवाते हैं...

तीर्थ पुरोहित दिनेश भी बिना दक्षिणा लिए अस्थियां विसर्जित करा रहे हैं। संस्था के अध्यक्ष मरवाला ने बताया कि संस्था लावारिसों का अंतिम संस्कार करती है। आत्मा की शांति के लिए यज्ञ करवाती है। संस्था की ओर से शिनाख्तगी के लिए शवों के फोटो की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। जिसमें कई अपनों की तलाश में आते हैं और पहचान करते हैं।

18 साल...8 हजार दाह संस्कार

संस्था सूरत में करीब 18 साल से संचालित है। अध्यक्ष मरवाला बताते हैं कि वे अब तक 8 हजार से अधिक अज्ञात व्यक्तियों के शवों का दाह संस्कार कर उनकी अस्थियां अलग-अलग पवित्र नदियों व सरोवरों में विसर्जित कर चुके हैं।

पुष्कर में संस्था की दरकार | सूरत की तर्ज पर पुष्कर में भी ऐसी संस्था की काफी दरकार है। पुष्कर एक धार्मिक तीर्थ स्थल होने के कारण यहां बड़ी संख्या में साधु-संत आते रहते हैं। आए दिन साधु-संत दम तोड़ते रहते हैं।

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