यमुनानगर, दामला के बाद अब प्लाईवुड उद्योग से जुड़े उद्योगपति अब अपने कारोबार को विस्तार रूप देने के लिए जठलाना क्षेत्र को तरजीह दे रहे हैं। यही कारण है कि इस एरिया में अब तक बीस से अधिक प्लाईवुड से जुड़ी इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। वहीं कुछ इकाइयां प्रोसेस में हैं। इन इकाइयों के तैयार होने पर जठलाना की औद्योगिक क्षेत्र के रूप में छवि विकसित होनी तय है।
अब तक इन स्थानों पर लगी हैं इंडस्ट्री : इस समय जठलाना में आठ, खजूरी में छह, नागल में दो, मारूपुर में दो, रापड़ी में एक प्लाईवुड फैक्ट्री चल रही है।
कंट्रोल एरिया से बाहर होने का मिल रहा है लाभ : जठलाना क्षेत्र कंट्रोल एरिया से बाहर है, सिर्फ खजूरी गांव तक कंट्रोल्ड एरिया है। इस एरिया में फैक्ट्री लगाने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इस कारण से उद्योगपति यहां पर कारोबार का विस्तार करने में रुचि दिखा रहे हैं।
एनओसी लेने के लिए फैक्ट्री के मालिक को करीब 350 रुपए प्रति स्कवेयर मीटर के हिसाब से फीस जमा करानी पड़ती है। जठलाना में फैक्ट्री लगाने पर यह फीस नहीं देनी पड़ती। फैक्ट्रियां लगने से क्षेत्र में जमीनों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। अब जठलाना व आसपास के गांव में सड़क पर लगती भूमि के दाम 80 से 90 लाख रुपए प्रति एकड़ चल रहा है।
दुकानदारों को मिल रहा है लाभ : जठलाना क्षेत्र में लगभग 20 प्लाईवुड फैक्ट्रियां लगने से इनमें 2 हजार के करीब लोग काम कर रहे हैं। ऐसे में इसका लाभ जठलाना के दुकानदारों को भी मिल रहा है। पूर्व सरपंच बीर सिंह ने बताया कि हजारों लोगों के क्षेत्र में आने से दुकानदारी बढ़ी है। दुकानदारों पर पहले से ज्यादा सामान बिक रहा है। इसके अलावा क्षेत्र के लोगों को भी रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि अगले एक दो वर्ष में क्षेत्र में 10 से 15 प्लाईवुड की नई फैक्ट्रियां लगने जा रहीं हैं। इससे आने वाले समय में जठलाना क्षेत्र प्लाईवुड उद्योग के तौर पर जाना जाएगा।
प्रदूषण है समस्या, श्रमिक खुले में कर रहे शौच
जठलाना क्षेत्र में प्लाईवुड उद्योग के कारण ग्रामीणों के लिए अब प्रदूषण की समस्या भी खड़ी हो गई है। उद्योगों से निकलने वाले धुएं के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य व फसलों पर गहरा असर पड़ना शुरू हो गया है। जठलाना निवासी राजकुमार संधू, बीर सिंह ने बताया कि उद्योगों के धुएं से लोगों को अब सांस लेने में दिक्कत आने लगी है। उद्योगों से जहां क्षेत्र का विकास हो रहा है, वहीं प्रदूषण बढ़ने से लोगों का स्वास्थ्य भी बिगड़ता जा रहा है। दूसरी ओर फैक्ट्रियों में काम कर रहे श्रमिक खुले में शौच कर रहे हैं। इससे किसानों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर सुबह शाम खेतों में खुले में शौच करके वातावरण को दूषित कर रहे हैं। इससे किसान बेहद परेशान हैं। खेती करना मुश्किल हो गया है।