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आवर्धन नहर की पटरी में पड़ी दरार, खेतों में भरा पानी, सिंचाई विभाग ने कट्टे लगाकर किया बंद

3 वर्ष पहले
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मंगलवार की अलसुबह गांव अलाहर के समीप आवर्धन नहर की पटरी में दरार पड़ने से पानी की लीकेज शुरु हो गई। जिससे नहर का पानी किसानों के खेतों में निकलना शुरू हो गया। खेतों में पानी निकलने की सूचना किसानों को लगी, तो वह अपने-अपने खेतों की ओर दौड़ पड़े। तुरंत सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को दी गई।

जेई अरुण कुमार कर्मचारियों सहित मौके पर पहुंचे और अर्थमूविंग मशीन व मिट्टी के कट्टों के साथ नहर की पटरी में फूटे दरड़ को पाटने का कार्य शुरू किया। लेकिन तब तक करीब 30 एकड़ खेत में पानी भर गया। गांव अलाहर के सरपंच गोपाल कृष्ण व जोगिंद्र ने बताया कि करीब दो दिन पहले आवर्धन नहर में उनके खेत के पास लीकेज हो रही थी।

आज फिर उसी जगह पर पानी अधिक तेजी से नहर से बाहर निकल कर किसानों के खेतों की ओर बढ़ गया और गांव के जोगिंद्र की आधा एकड़ भूमि में खड़े हरे चारे, राजेश का एक एकड़ गन्ने, रमेश के एकड़ में खड़े उड़द व गांव मंधार निवासी मानसिंह के खाली पड़े एक एकड़ भूमि में पानी जमा हो गया। ग्रामीणों की सजगता से समय रहते इस पर काबू पा लिया गया। जेई अरुण कुमार ने बताया कि मिट्टी में टेंपरेचर क्रक्स होने के कारण घूरलू हो गया था। अब स्थित अंडर कंट्रोल है। अब कोई दिक्कत नहीं है।

नहर की पटरी में दरार पड़ने से करीब 30 एकड़ खेत में पानी भर गया, िकसानों की सजगता से समय रहते काबू पाया

रादौर| गांव अलाहर में नहर की टूटी पटरी को ठीक करती अर्थमूविंग मशीन।

पांच करोड़ खर्च के बाद भी टूट रही आवर्धन नहर घटिया सामग्री व रेत खनन की वजह से बनी ऐसी स्थिति

जठलाना | करीब दो साल पहले जिस आवर्धन नहर की मरम्मत पर पांच करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। आज उस आवर्धन नहर के खस्ताहाल होने की स्थिति ब्यां होनी शुरू हो गई। आवर्धन नहर में गांव अलाहर के समीप पटरी के नीचे दरार पड़ गई। यह सब पटरी की मरम्मत में खानापूर्ति व रेत खनन की वजह से हुआ है। हालांकि समय रहते इस पर काबू तो पा लिया गया लेकिन दो वर्ष पहले खर्च किए गए पांच करोड़ पर सवालियां निशान खड़े हो गए। ग्रामीणों का भी खुला आरोप है कि मरम्मत के नाम पर केवल लीपापोती हुई और अधिकारियों व नेताओ ने जेबें गर्म की। आवर्धन नहर से पानी निकलकर किसानों के खेतों में पहुंचने का यह मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी आवर्धन नहर 15 दिसबंर 2011 को गांव ठसका खादर के पास व 12 अप्रैल 2015 को गांव पालेवाला के समीप दो बार टूट चुकी है। जिससे किसानों को तब भारी नुकसान उठाना पड़ा था। लेकिन उसके बाद भी आज तक प्रशासन व सिंचाई विभाग ने इसकी खस्ताहाल स्थिति को नहीं सुधारा।

मरम्मत के नाम पर घोटाले का आरोप: किसान व ग्रामीण जयदेव, रवि, मनोज, रमन, कमल, सुनील, राजेश कुमार, संजीव, सुनील, सतीश व गगन कुमार का कहना है कि नहर की मरम्मत केवल मात्र एक ढकोसला साबित हुई है क्योंकि नहर की हालत जितनी खस्ता थी उस हिसाब से नहर की मरम्मत नहीं की गई है। यह कार्य में बड़े घोटाले की संकेत कर रहा है।

मरम्मत के समय पानी की सप्लाई भी की थी बंद

पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के कार्यकाल में 70 के दशक में बनाई गई आवर्धन नहर में पानी की सप्लाई को पहली बार मरम्मत के लिए नवंबर 2015 में पूर्ण रूप से बंद किया गया था। ताकि नहर की मरम्मत का कार्य उचित प्रकार से किया जा सके। नहर की मरम्मत के लिए 75 किलोमीटर का एरिया निर्धारित किया गया था। लेकिन दक्षिण हरियाणा के लिए पानी बंद करने के बावजूद नहर की मरम्मत ठीक प्रकार से नहीं हो सकी। जिस कारण अब नहर से पानी निकलने का सिलसिला दोबारा शुरू हो चुका है।

आवर्धन नहर की मरम्मत का टेंडर कितने में हुआ था व किस कंपनी को दिया गया था इस बारे में कुछ याद नहीं है। ग्रामीणों व किसानों द्वारा लगाए जा रहे निराधार है। रेत खनन वहां नहीं करवाया गया था, जहां पर अब दरड़ फूटा है। केवल कुछ किलोमीटर के एरिया में रेत खनन किया गया था। मनीष कुमार, एक्सईएन आवर्धन नहर

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