खेवड़ा गांव में रविवार को बाबा कुंदनलाल की याद में हवन यज्ञ का अायोजन कराया गया। जिसमें गांव की सुख शांति की कामना की गई। भैराबाकिपुर गांव में कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा शुरू हो गई। जिसमें पहुंचे कथा व्यास पंडित प्रदीप कृष्ण ने कहा कि वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल है श्रीमद् भागवत। जिसके सेवन से सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्म की रक्षा के लिए ही भगवान को अजन्मा होते हुए भी जन्म लेना पड़ा था।
बाबा कुंदनलाल के सेवक पंडित विनोद कौशिक ने कहा कि बाबा कुंदनलाल की गांव में प्राचीन मान्यता है। पड़ोस के गांव असावरपुर में बाबा कुंदनलाल ने तप किया था। वहां उनकी एक कुटी भी है। ऐसी मान्यता है कि जो इंसान बाबा कुंदनलाल के प्रति आस्था रखता है, उसे बाबा जीवन की हर खुशी देता है। इस अवसर पर पंडित ओमप्रकाश कौशिक, नरेश कुराड़, धर्मबीर सिवाह, प्रदीप सिद्धीपुर लोवा, देवेंद्र कुराड़, जोगेंद्र हुलंबी , राजेश जाखौली, बागपत से संजय, मोहित असावरपुर, ऋषिप्रकाश , टीटू गन्नौर आदि मौजूद थे।
बद्रीनाथ से ऊपर सम्या प्रांत क्षेत्र में श्रीमद् भागवत की रचना हुई : पं. प्रदीप कृष्ण
भैराबाकिपुर गांव में रविवार से कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा शुरू हो गई। कथावाचक व्यासजी पंडित प्रदीप कृष्ण ने चार प्रश्नों के साथ कथा प्रारंभ की। पहला प्रश्न रखा गया कि भागवत क्या है। जिसका सुंदर जवाब दिया गया कि भागवत एक वृक्ष का पका हुआ फल है। दूसरा प्रश्न हुआ कि भागवत की रचना कब और कहां हुई। इसका उत्तर दिया गया कि व्यास महाराज ने सरस्वती नदी के किनारे बद्रीनाथ से ऊपर सम्या प्रांत क्षेत्र में श्रीमद् भागवत की रचना की थी। तीसरा प्रश्न था कि कलयुग में धर्म किसकी शरण में कब गया। इसका उत्तर दिया गया कि कलयुग में धर्म भागवत की शरण में गया। अंतिम प्रश्न में पूछा गया कि भगवान अजन्मा होकर भी जन्मा क्यों। इसका जवाब दिया कि विप्र, धेनू, सुर व संत हित के लिए भगवान को जन्म लेना पड़ा। भगवान ने कभी जन्म नहीं लिया, लेकिन भक्तों के हित के लिए उन्हें अवतार धारण कर पृथ्वी पर आना ही पड़ा। इस मौके पर भाजपा निगरानी कमेटी के चेयरमैन सुनील चौहान, ब्लॉक समिति राई के चेयरमैन संजय चौहान, जिला पार्षद नंदकिशोर चौहान, जयराम शर्मा, समिति सदस्य मास्टर सतीश चौहान, राधेश्याम आदि माैजूद थे।
राई . खेवड़ा गांव में बाबा कुंदनलाल की याद में हुए हवन यज्ञ में आहुति डालते श्रद्धालु।