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60 हजार हेक्टेयर में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य, किसानों से ऑनलाइन मांगे जाएंगे आवेदन

3 वर्ष पहले
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हरियाणा के धान (चावल) की प्रसिद्धि देश व विदेशों में ज्यों की त्यों बनाए रखने के लिए रोपाई की बजाए सीधी बिजाई का तरीका सफल रहा है। वर्ष 2018 में प्रदेश के 30 हजार से बढ़ाकर 60 हजार हेक्टेयर में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा गया है। इस बार किसानों से ऑनलाइन लेकर सीधी बिजाई की जाएगी। इसको सफल बनाने के लिए कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्रों ने प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है।

प्रदेश में 12 लाख हेक्टेयर में धान की पैदावार होती है। धान उगाने के लिए रोपाई को तवज्जो देते हैं। पानी की ज्यादा मात्रा का प्रयोग होने से लगातार जलस्तर घटता जा रहा है। ऐसे स्थिति में आने वाले समय में धान की रोपाई बंद न करनी पड़े, इसको देखते हुए सीधी बिजाई का विकल्प तैयार किया है। सीधी बिजाई होने पर 30 फीसदी जल की बचत होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान धान की रोपाई की जगह सीधी बिजाई करते हैं तो वे केवल आगामी फसल की बेहतर उपज ले सकते हैं बल्कि जमीन के स्वास्थ्य को गिरने से बचाया जा सकता है। साथ ही सीधी बिजाई कर अन्य कई तरह की समस्याओं से छुटकारा ले सकते हैं। इतना ही नहीं कम पानी वाले क्षेत्रों में भी धान की सीधी बिजाई बतौर विकल्प हो सकती है।

जानिए... खेत तैयार करने धान की सीधी बिजाई के दो तरीके

वत्तर सीधी बिजाई

1 बिजाई के लिए चाहिए बत्तर खेत: वत्तर सीधी बिजाई खेत के बत्तर आने पर करते हैं। इसमें डीएसआर ड्रिल से 3 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर बिजाई करें। बिजाई करने के तुरंत बाद सुहागा लगाने के बाद ही 1250 मिलीलीटर पैंडीमिथलिन नामक खरपतरवार नाशक दवा का छिड़काव प्रति एकड़ की दर से करें ताकि खरपतवारों के जमाव को कुछ दिन तक जमने से रोका जा सके। पहली सिंचाई बिजाई के एक सप्ताह बाद करें। बिजाई के 15-25 दिन बाद दूसरी दवा बिस्पाइरीबैक 100 मिली लीटर प्रति एकड़ की दर से करें। किसानों को चाहिए कि वे नमी बरकरार रखने के लिए बिजाई सुबह या शाम के समय ही बिजाई करें।

सूखी सीधी बिजाई

2 बिजाई के तुरंत बाद करें सिंचाई: सूखी सीधी बिजाई में खेत तैयार कर सुहागा लगाने के बाद 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर ड्रिल की मदद से बिजाई की जाती है। बिजाई के तुरंत बाद खेत की हलकी सिंचाई करते हैं। तीन दिन के अंदर खरपतवार नाशक पेंडिमेथिलिन दवा का छिड़काव किया जाता है। बिजाई के 15 से 25 दिन बाद दूसरी खरपतवार नाशक बीस्पाइरीबैक दवा का छिड़काव किया जाता है। किसानों को चाहिए कि वे खादों का प्रयोग जमीन के प्रयोगशाला में टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही देंवे लेकिन बिना टेस्ट के 25 किलोग्राम डीएपी एवं 10 किलोग्राम जिंक बिजाई के समय डालें। डीएपी ड्रिल मशीन में डाला जा सकता है। धान की सीधी बिजाई में खाद की मात्रा रोपाई वाली धान की तरह ही रहेगी।

सीधी बिजाई के लिए धान की किस्में

सीएसआर-30, पीबी-1509, पूसा-1121, तरावडी बासमती पूसा बासमती-1, (कुछ संकर किस्मों भी लाभदायक)

बीज उपचार: प्रति किलो बीज को 8 लीटर पानी में 24 घंटे भिगाए। बुवाई से पहले एक ग्राम कार्बेंडिजिम प्रति किलो बीज 8 लीटर पानी में 24 घंटे भिगोएं एवं इसमें एक ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्टेप्टोसाइक्लिन भी डालें। बीज को कुछ देर छाया में सुखाने उपरांत ही बिजाई के लिए मशीन में डालें। 20-25 किग्रा. बीज/ हेक्टेयर पर्याप्त होंगे।

सीधी बिजाई के प्रयुक्त बीज व खाद का करें प्रयोग

डॉ. जसबीर के अनुसार धान के बीज के अच्छे जमाव के लिए बेहतर होगा कि बिजाई से पहले जमीन का लेजर लेवलर मशीन की मदद से समतलीकरण हो। इससे बीज की गहराई भी एक समान होगी एवं सिंचाई के जल का वितरण भी एक तरह का होगा। जमीन में बेहतर तरीके से बीज डालने के लिए बीज वितरण प्रणाली मशीन जिसमें झुकी एवं खड़ी प्लेट का उपयोग अच्छा रहता है। किसान धान की बिजाई करते समय उन बीज एवं खाद ड्रिल का प्रयोग करें, जो सीधी बिजाई के लिए प्रयुक्त हो। इस वितरण प्रणाली में सही बीज की सही मात्रा डालने के साथ बीज की टूट-फूट नहीं होती है जो कि फलोटेड रोलर प्रणाली में होती है।

रोपाई करने के बजाए मशीन की मदद से करें सीधी बिजाई

कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के कॉर्डिनेटर डॉ. जसबीर सिंह का कहना है कि अधिकतर किसान पारंपरिक तरीकों से खेती कर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन लगातार कर रहे हैं जो कि चिंतनीय विषय है। किसान फसल उगाने की तकनीकों में अगर वैज्ञानिकों की ओर से सुझाई तकनीकों का इस्तेमाल करें तो प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट होने से केवल बचाया जा सकेगा बल्कि किसान ज्यादा मुनाफा ले सकते हैं। इसी तरह किसान धान की कुछ किस्मों में फसल की रोपाई करने के बजाए मशीन की मदद से सीधे धान के बीज की सीधी बिजाई कर सकते हैं जिसे धान की सीधी बिजाई के नाम से जाना जाता है। धान की सीधी बिजाई के लिए जून का दूसरा-तीसरा सप्ताह सही माना जाता है।

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