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25 सौ सीट भरने का लक्ष्य, स्लो सर्वर के कारण 10 दिन में आए 489 आवेदन

3 वर्ष पहले
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रायपुर को छोड़ रायगढ़ समेत प्रदेश के सभी जिलों में पहली बार शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) में ऑनलाइन एडमिशन दिया जा रहा है। निजी स्कूलों द्वारा पोर्टल में ऑनलाइन रिकार्ड बनाते समय कुछ त्रुटियां की गई है, जिसका खामियाजा अब पालकों को भुगतना पड़ रहा है। आरटीई में इस बार 25 सौ छात्रों को एडमिशन देने का लक्ष्य पर है पर स्लो सर्वर सहित अन्य कारणों से भर्ती के लिए अब तक 489 आवेदन ही आए हैं।

पोर्टल में कई स्कूलों का नाम गायब है तो कहीं सर्वर स्लो होने और ओटीपी जनरेट नहीं होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस ऑनलाइन पोर्टल में प्राइवेट स्कूल का नाम, ब्लाक, लोकेशन, हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से लेकर डायस कोड एवं सीटों की संख्या डिसप्ले होना है, पर अपनी यूजर आईडी बनाते समय कई स्कूलों ने पूरी जानकारी अपडेट नहीं की। इस वजह से कई स्कूलों में आरटीई की सीट की संख्या नहीं दिख रही है। 8 मई से ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है जो 25 मई तक आवेदन किया जा सकता है। पिछले 10 दिनों में महज 489 आवेदन आए है। इसको लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद डीईओ आरपी आदित्य ने जिले के सभी नोडल अफसरों व प्राइवेट स्कूल संचालकों की बैठक बुलाने का आदेश बीईओ को जारी किया था। शुक्रवार को सभी बीईओ ने अपने अपने ब्लॉक क्षेत्रों में स्कूल संचालकों व नोडल अफसरों की बैठक लेकर परेशानी एवं सुझावों पर चर्चा किया।

इन बच्चों को देना है दाखिला. अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरटीई की धारा 12 के अंतर्गत आरक्षित रखा गया है। इन्हीं सीटों पर प्रवेश दिया जाना है। प्रवेश की कार्यवाही शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए होगी, लेकिन स्कूलों का नाम डिस्पले नहीं होने और सर्वर डाउन होने की वजह से तय समय पर एडमिशन की चिंता पालकों को सताने लगी है।

फैक्ट फाइल

422 प्राइवेट स्कूल की संख्या

343 आरटीई के लिए पंजीयन

2503 आरटीई के लिए कुल सीट

1121 नर्सरी के लिए सीट

1395 केजी वन के लिए सीट

87 पहली के लिए कुल सीट

भास्कर न्यूज | रायगढ़

रायपुर को छोड़ रायगढ़ समेत प्रदेश के सभी जिलों में पहली बार शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) में ऑनलाइन एडमिशन दिया जा रहा है। निजी स्कूलों द्वारा पोर्टल में ऑनलाइन रिकार्ड बनाते समय कुछ त्रुटियां की गई है, जिसका खामियाजा अब पालकों को भुगतना पड़ रहा है। आरटीई में इस बार 25 सौ छात्रों को एडमिशन देने का लक्ष्य पर है पर स्लो सर्वर सहित अन्य कारणों से भर्ती के लिए अब तक 489 आवेदन ही आए हैं।

पोर्टल में कई स्कूलों का नाम गायब है तो कहीं सर्वर स्लो होने और ओटीपी जनरेट नहीं होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस ऑनलाइन पोर्टल में प्राइवेट स्कूल का नाम, ब्लाक, लोकेशन, हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से लेकर डायस कोड एवं सीटों की संख्या डिसप्ले होना है, पर अपनी यूजर आईडी बनाते समय कई स्कूलों ने पूरी जानकारी अपडेट नहीं की। इस वजह से कई स्कूलों में आरटीई की सीट की संख्या नहीं दिख रही है। 8 मई से ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है जो 25 मई तक आवेदन किया जा सकता है। पिछले 10 दिनों में महज 489 आवेदन आए है। इसको लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद डीईओ आरपी आदित्य ने जिले के सभी नोडल अफसरों व प्राइवेट स्कूल संचालकों की बैठक बुलाने का आदेश बीईओ को जारी किया था। शुक्रवार को सभी बीईओ ने अपने अपने ब्लॉक क्षेत्रों में स्कूल संचालकों व नोडल अफसरों की बैठक लेकर परेशानी एवं सुझावों पर चर्चा किया।

इन बच्चों को देना है दाखिला. अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरटीई की धारा 12 के अंतर्गत आरक्षित रखा गया है। इन्हीं सीटों पर प्रवेश दिया जाना है। प्रवेश की कार्यवाही शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए होगी, लेकिन स्कूलों का नाम डिस्पले नहीं होने और सर्वर डाउन होने की वजह से तय समय पर एडमिशन की चिंता पालकों को सताने लगी है।

जानिए इस साल पोर्टल में अब तक क्यों आवेदन आए कम

सभी स्कूलों की जानकारी नहीं

आरटीई में एडमिशन के लिए 422 प्राइवेट स्कूल संचालकों को विभाग ने प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद भी करीब 79 स्कूलों ने पंजीयन नहीं किया तो पोर्टल में इनका नाम नहीं दिख रहा है। जिंदल समेत बड़े स्कूल शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का नाम गायब होने की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। क्योंकि यहां निजी स्कूलों की संख्या गिनती की है।

उम्र बन रही बाधा

जिले में प्राइवेट स्कूलों ने अपना पंजीयन कराते वक्त नर्सरी एवं केजी वन एवं पहली में एडमिशन के लिए बच्चों की जो उम्र निर्धारित की थी। वो अब आवेदन में बाधा बन गई है। इसके अलावा स्कूलों की दूरी वाला फार्मूला भी एक परेशानी है । पोर्टल में बच्चों की उम्र व निवास की इस बाध्यता के कारण ज्यादातर आवेदन खारिज हो जा रहे हैं।

समस्या दूर करने का प्रयास कर रहें

आरटीई में कम आवेदन आने और इसमें आ रही परेशानी को दूर करने के लिए सभी बीईओ ने स्कूल संचालकों व नोडल अफसरों के साथ बैठक लेकर चर्चा की है। कुछ परेशानियां आ रही है जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। आरपी आदित्य, डीईओ

समय लग रहा ज्यादा

ज्यादातर आवेदनों में अभी ऐसे ही परेशानी आ रही है। च्वाइस सेंटर के आपरेटर ने बताया कि आरटीई के इस धीमे पोर्टल के कारण एक आवेदन सबमिट करने में 15 से 20 मिनट लग जा रहे हैं। जबकि यह काम महज 2 से 3 मिनट का ही है। आरटीई के पोर्टल में ऐसे तकनीकी खामियों के कारण जिले भर से ऐसे ही परेशानियां आ रही है।

सर्वर स्लो व ओटीपी नहीं बन हरा

आवेदन च्वाइस सेंटरों के साथ ही लोक सेवा केन्द्र और साइबर कैफे में भी लिए जा रहे हैं। इसकी वजह से सर्वर हमेशा स्लो रहने की बात कही जा रही है। सर्वर डाउन होने की वजह से ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) जनरेट नहीं हो पा रहा है। जिससे आवेदन करने गए पालक के मोबाइल पर पासवर्ड नहीं आने से आवेदन बीच में ही अटक रहा है।

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