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3 लाख नक्शा खसरा का डिजिटलाइजेशन अधूरा, आधार सीडिंग का काम भी धीमा

3 वर्ष पहले
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रायगढ़ | जमीन के फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए नक्शा खसरा को ऑनलाइन किया जा रहा है। जिले में 81 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राज्य शासन ने मार्च महीने तक 100 प्रतिशत काम पूरा करने का आदेश दिया था, लेकिन इस अवधि में लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। नक्शा खसरा को ऑनलाइन करने के साथ ही जमीन खाता से आधार सीडिंग भी कराई जा रही है। आधार सीडिंग का काम जिले में पिछड़ा हुआ है।

इसके चलते अब राजस्व विभागों में आधार सीडिंग व नक्शा खसरा का डिजिटलाइजेशन का काम पूरा करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। तहसील से 100 फीसदी रिकार्ड अपडेट होते हैं तो लोगों को आबादी जमीन का रिकार्ड भी ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे लोग आसानी से रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ जमीन का खसरा रिकार्ड भी पेश कर पाएंगे। इससे जो रजिस्ट्री अभी नहीं हो पा रही है वो भी हो सकेगी। जमीन के रिकार्ड अपडेट नहीं होने की वजह से आबादी जमीन के रिकार्ड पर किसी भी तरह का विवाद होने पर सीमांकन, नामांतरण और बटांकन के मामले अटक जाते हैं। भुईंया के तहत जमीन के रिकार्ड अपडेट होते हैं तो लोगों को खातों की जानकारी के लिए तहसील दफ्तर नहीं जाना होगा, सारी जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी। नजूल जमीन की रजिस्ट्री के दौरान उसमें शीट और ब्लॉक नंबर नहीं मिलता है। इसकी वजह से यह पता ही नहीं चलता है कि नजूल जमीन की वास्तविक लोकेशन क्या है, लेकिन यह काम 100%पूरा होते ही लोगों की परेशानी खत्म हो जाएगी।

एंट्री में लग रहा समय: पटवारियों को अपने हल्का नंबर के सभी खसरों में आधार सीडिंग का काम करते हुए नक्शा खसरा डिजिटलाइजेशन का काम करना है। अपनी ला-गिन आईडी से एक एंट्री करने में सामान्य रूप से 4 से 5 मिनट ही लगते हैं लेकिन नेट कनेक्टिविटी एवं खराब सर्वर के कारण एक एंट्री करने में 20 से 25 मिनट लग जा रहे हैं। जिससे पटवारी परेशान हैं।

3 लाख खातों का डिजिटलाइजेशन अधूरा

जिले में 15 लाख 95 हजार 746 लाख खसरा का मिलान कर डिजिटलाइजेशन का काम पूरा किया जाना है लेकिन इसके लिए तहसील कार्यालयों में पर्याप्त रूप से कम्प्यूटर ही नहीं हैं। वहीं एनआईसी का धीमा सर्वर एवं नेट कनेक्टिविटी में भी परेशानी आने के कारण अभी काम 81 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। अभी भी करीब 3 लाख नक्शा खसरा का डिजिटलाइजेशन अधूरा है।

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