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एक के बदले डेढ़ लाख चुकाए फिर भी मूलधन मांग रहा था सूदखोर, धमकाने पर मामला दर्ज

3 वर्ष पहले
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बुधवार को थाना कोतवाली में एक सूदखोर धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध ब्याज में ली रकम वापस मांगने के लिए धमकाने पर अपराध दर्ज किया है। ब्याज पर रुपए लेने वाले ने एक शख्स ने एसपी से शिकायत करते हुए बताया था कि उसने एक लाख रुपए का कर्ज 10 फीसदी मासिक ब्याज की दर पर लिया। उसने डेढ़ लाख चुका भी दिए लेकिन सूदखोर बाजपेयी मूलधन बाकी बताकर उसे धमका रहा है। पुलिस ने 4 कर्जा एक्ट और धारा 384 के तहत कार्रवाई की है।

शहर में सूदखोरी का धंधा चरम पर है। इनमें ज्यादातर बगैर लाइसेंस के ब्याज पर रुपए देने का धंधा करते हैं। इतना ही नहीं लाइसेंसी मनीलेंडर (उधार देने वाले) भी नियमों को ताक पर रखकर वसूली करते हैं। ये लोग छोटे कर्मचारियों, मजदूरों, ठेला पसरा लगाने वाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर मोटे ब्याज पर कर्ज देते हैं। इसके बाद अपनी मर्जी से चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं। ये लोग कर्ज के एवज में सामान गिरवी रखते हैं और सरकारी या निजी नौकरीपेशा कर्मचारियों को उधार देकर उनके चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड रखते हैं। ऐसा ही एक मामला कोतवाली थाना क्षेत्र में आया है। शहर के ही अजय कुमार ने हंडी चौक के पास रहने वाले धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध ब्याज में लिये रकम बकाया होने की बात कहकर गाली गलौज और मारपीट की धमकी देने की शिकायत की है। अजय ने 2015 में एक लाख रुपए धरनीधर बाजपेयी से 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर उधारी में लिया था। उस समय धरनीधर बाजपेयी ने इसकी और इनकी मां का एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक रख लिया । जिसका मूलधन ब्याज सहित 1.5 लाख रुपए अजय अदा कर चुका है। बावजूद धरनीधर मूलधन बकाया कहकर एटीएम और पासबुक वापस नहीं दे रहा था। एटीएम पासबुक मांगने पर मारने-पीटने की धमकी देता था। इसके बाद अजय ने पुलिस को आवेदन देकर इसकी शिकायत की। शिकायत पर धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

पुलिस के सिपाहियों से लेकर घरों में काम करने वाली नौकरानियों तक से वसूलते हैं 10% मासिक ब्याज

घर बेच दिया लेकिन नहीं छूटा कर्ज

एक परिवार एसपी कार्यालय में सूदखोरी की शिकायत करने आया था। परिवार के एक युवक ने बताया था कि उसके पिता जिंदल में लोको पायलट हैं और उसकी पढ़ाई के लिए उन्होंने लोन लिया था। कर्ज को पटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया और सूदखोर उनके एटीएम और पासबुक से हर माह की तनख्वाह भी लेता था, लेकिन आज तक उन्हें कर्ज से मुक्ति नहीं मिली। घरों में काम कर अपना परिवार चलाने वाली शकुंलता ने एक साहूकार से चार साल पहले 3 हजार रुपए लिए थे। अब वह 28 हजार रुपए मांग रहा है।

भास्कर न्यूज, रायगढ़

बुधवार को थाना कोतवाली में एक सूदखोर धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध ब्याज में ली रकम वापस मांगने के लिए धमकाने पर अपराध दर्ज किया है। ब्याज पर रुपए लेने वाले ने एक शख्स ने एसपी से शिकायत करते हुए बताया था कि उसने एक लाख रुपए का कर्ज 10 फीसदी मासिक ब्याज की दर पर लिया। उसने डेढ़ लाख चुका भी दिए लेकिन सूदखोर बाजपेयी मूलधन बाकी बताकर उसे धमका रहा है। पुलिस ने 4 कर्जा एक्ट और धारा 384 के तहत कार्रवाई की है।

शहर में सूदखोरी का धंधा चरम पर है। इनमें ज्यादातर बगैर लाइसेंस के ब्याज पर रुपए देने का धंधा करते हैं। इतना ही नहीं लाइसेंसी मनीलेंडर (उधार देने वाले) भी नियमों को ताक पर रखकर वसूली करते हैं। ये लोग छोटे कर्मचारियों, मजदूरों, ठेला पसरा लगाने वाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर मोटे ब्याज पर कर्ज देते हैं। इसके बाद अपनी मर्जी से चक्रवृद्धि ब्याज वसूलते हैं। ये लोग कर्ज के एवज में सामान गिरवी रखते हैं और सरकारी या निजी नौकरीपेशा कर्मचारियों को उधार देकर उनके चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड रखते हैं। ऐसा ही एक मामला कोतवाली थाना क्षेत्र में आया है। शहर के ही अजय कुमार ने हंडी चौक के पास रहने वाले धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध ब्याज में लिये रकम बकाया होने की बात कहकर गाली गलौज और मारपीट की धमकी देने की शिकायत की है। अजय ने 2015 में एक लाख रुपए धरनीधर बाजपेयी से 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर उधारी में लिया था। उस समय धरनीधर बाजपेयी ने इसकी और इनकी मां का एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक रख लिया । जिसका मूलधन ब्याज सहित 1.5 लाख रुपए अजय अदा कर चुका है। बावजूद धरनीधर मूलधन बकाया कहकर एटीएम और पासबुक वापस नहीं दे रहा था। एटीएम पासबुक मांगने पर मारने-पीटने की धमकी देता था। इसके बाद अजय ने पुलिस को आवेदन देकर इसकी शिकायत की। शिकायत पर धरनीधर बाजपेयी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

पुलिस के जवान भी इसी कर्ज से त्रस्त

पुलिस के कई जवानों ने मोटे ब्याज दर पर कर्ज लिया हुआ है। बाजपेयी और शहर के अन्य सूदखोरों को कर्ज के एवज में अधिक ब्याज देना पड़ता है। पुलिस के अफसर ही बताते हैं कि कई पुलिस कर्मी बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य कार्यों के लिए 10-12 फीसदी मासिक ब्याज की दर पर उधार लेते हैं। पुलिस विभाग में होकर भी सूदखोरों की शर्तों से ऐसे घिरे होते हैं कि ब्याज देते रहते हैं लेकिन मूलधन जस का तस बना रहता है। इसे बचने के लिए एक साल पहले पुलिस ने सहकारी बैंक खोला है।

क्या कहता है कानून

मध्यप्रदेश के लिए बना मनी लेंडिंग एक्ट 1934 ही छत्तीसगढ़ में प्रभावी है। इसमें 2010 में मामूली संशोधन किया गया। वसूली की शिकायत मिलने के बाद आईपीसी की धारा 384 की तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें सजा का प्रावधान भी है।

ये प्रस्ताव लेकिन माने

नहीं अब तक

सूदखोरों की मनमानी की शिकायतों के बाद वर्ष 2015 में सरकार को एक्ट में इन संशोधन के लिए कहा गया था लेकिन अब तक माना नहीं गया है।

साहूकार का पंजीयन एसडीएम करें

देनदारों द्वारा दी गई राशि की पूरी जानकारी

ब्याज का कारोबार करने वाले उधार लेने वालों के चेकबुक, पासबुक या एटीएम नहीं रख सकता।

बगैर जानकारी के साहूकार ऋण लेने वाले के बैंक खाते से रुपए नहीं निकाल सकता।

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