धान बेचने बोगस एंट्री कराई थी, अब रिकवरी होगी
खरसिया ब्लॉक के बानीपाथर धान खरीदी केंद्र में 19 किसानों द्वारा पटवारी के साथ मिलकर रकबा बढ़वाकर पंजीयन कराने और समर्थन मूल्य पर धान की बोगस बिक्री का मामला सामने आया था। कलेक्टर को इसकी शिकायत मिलने पर उन्होंने खरसिया एसडीएम को जांच के निर्देश दिए थे।
एसडीएम ने जांचकर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। इस मामले में जल्द ही किसानों से बोगस रकबे से बेचे गए धान की कीमत रिकवर की जाएगी। वहीं दोषी अफसरों के खिलाफ जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर को किए गए लिखित शिकायत में बताया गया था कि बानीपाथर धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक जनक राम पटेल, तात्कालीन पटवारी तिहारु राम सारथी और सत्यापन अफसर द्वारा मिलीभगत कर मदनपुर एवं देहजरी के 19 किसानों ने लगभग 300 एकड़ का रकबा बढ़ाकर समर्थन मूल्य पर धान बेचा था। इस शिकायत पर कलेक्टर ने खरसिया एसडीएम से जांच करने के लिए कहा था। जांच रिपोर्ट प्रभारी कलेक्टर को सौंपी गई है। जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। दोषी अफसरों की जांच के बाद धोखाधड़ी व गबन का मामला दर्ज कराने की बात उप पंजीयक विभाग के अफसरों द्वारा कही जा रही है।
सभी अफसरों ने इस पूरी कार्रवाई को सही ठहराया है।
इन किसानों पर रकबा बढ़वाने का लगा है आरोप
रथ लाल, सीताराम, कैलाश, गणेश, चंदन, पीलूराम, राधेश्याम, द्वारिका प्रसाद, करमा वती, गायत्री, राजेश कुमार, बरत राम, कमल प्रसाद सहित अन्य किसान शामिल हैं। इन किसानों द्वारा संबंधित हल्का पटवारी के साथ मिलकर अपनी वास्तविक रकबा से तीन से चार गुना ज्यादा रकबे बढ़वा कर पंजीयन करा लिया। राज्य शासन ने प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदी करने की लिमिट रखी है। ऐसे में इन किसानों के द्वारा अपनी सभी धान और बाजार से कम कीमत पर खरीद कर शासन से बोनस लेने के लालच में गड़बड़ी की है। दो साल से चल रहा है खेल, तात्कालीन नायब तहसीलदार को फंसाया बानीपाथर धान खरीदी केंद्र में इस तरह की गड़बड़ी पिछले कई सालों से चल रही है। करीब दो साल पहले तात्कालीन नायब तहसीलदार प्रफुल्ल कुमार रजक ने इस गड़बड़ी उजागर की थी, लेकिन आरोपियों ने नायब तहसीलदार को एक झूठे मामले में फंसा दिया।