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6 लाख का वृद्धा व बाल आश्रम खंडहर में बदला, अफसरों को जानकारी ही नहीं

3 वर्ष पहले
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4 साल पहले सांसद मद से वार्ड क्रमांक 6 में वृद्धा और बाल आश्रम आरईएस ने तैयार किया था। तैयार करने के बाद आरईएस ने इसे सोनहा बिहान नामक निजी संस्था को सौंप दिया था। 4 साल हो गए भवन बनकर खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन किसी को इस संबंध में जानकारी नहीं है। समाज कल्याण विभाग और महिला बाल विकास दोनों ही इस आश्रम के निर्माण से अंजान है। जबकि नियमतः संबंधित विभाग को ही हैंडओवर होना चाहिए था। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में जिला योजना मंडल में जाकर फाइल खंगालने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें फाइलें आधी-अधूरी मिलीं। निजी संस्था को तो भवन दे दिया गया लेकिन अभी तक उस निजी संस्था ने इसे उपयोग में नहीं लिया है। मामला वार्ड नंबर 6 के दीनदयाल कॉलोनी का है। यहां वर्ष 2013-14 में बाल एवं वृद्धाश्रम के लिए सांसद मद से 3 लाख 99 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे। नियम के अनुसार सांसद मद से जारी हुआ पैसा जिला योजना मंडल को जाता है। योजना मंडल ने राशि आरईएस निर्माण एजेंसी को दे दी। आरईएस ने रुपए स्वीकृत होने के बाद काम शुरू किया। 2014 तक काम पूर्ण हो गया लेकिन वायरिंग और कुछ अन्य कार्यों के लिए फिर से 2 लाख रुपए स्वीकृत कराए गए। इस तरह आरईएस ने 2015 में काम पूर्ण कर बिहान समिति की अध्यक्ष सुषमा खलखो को भवन सौंप दिया।

उपयोग नहीं होने से भवन की ऐसी स्थिति हो गई है।

स्वीकृत राशि को लेकर विरोधाभास

स्वीकृत राशि को लेकर भी सभी विभागों के बीच विरोधाभास है। आरईएस ने बताया कि उसने पहली किस्त 3 लाख 99 हजार रुपए ली और फिर से दूसरी बार बचे कामों के लिए 2 लाख रुपए अतिरिक्त लिया गया। जबकि जिला योजना मंडल के अधिकारी के ए सिंह का कहना है कि उनके द्वारा केवल 3.99 लाख रुपए जारी किया गया है। जबकि भवन पर प्रथम स्वीकृत राशि 5 लाख और बाद में अतिरिक्त स्वीकृत राशि 2 लाख रुपए है। इसी तरह सबके बयान स्वीकृत राशि को लेकर अलग है।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

4 साल पहले सांसद मद से वार्ड क्रमांक 6 में वृद्धा और बाल आश्रम आरईएस ने तैयार किया था। तैयार करने के बाद आरईएस ने इसे सोनहा बिहान नामक निजी संस्था को सौंप दिया था। 4 साल हो गए भवन बनकर खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन किसी को इस संबंध में जानकारी नहीं है। समाज कल्याण विभाग और महिला बाल विकास दोनों ही इस आश्रम के निर्माण से अंजान है। जबकि नियमतः संबंधित विभाग को ही हैंडओवर होना चाहिए था। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में जिला योजना मंडल में जाकर फाइल खंगालने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें फाइलें आधी-अधूरी मिलीं। निजी संस्था को तो भवन दे दिया गया लेकिन अभी तक उस निजी संस्था ने इसे उपयोग में नहीं लिया है। मामला वार्ड नंबर 6 के दीनदयाल कॉलोनी का है। यहां वर्ष 2013-14 में बाल एवं वृद्धाश्रम के लिए सांसद मद से 3 लाख 99 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे। नियम के अनुसार सांसद मद से जारी हुआ पैसा जिला योजना मंडल को जाता है। योजना मंडल ने राशि आरईएस निर्माण एजेंसी को दे दी। आरईएस ने रुपए स्वीकृत होने के बाद काम शुरू किया। 2014 तक काम पूर्ण हो गया लेकिन वायरिंग और कुछ अन्य कार्यों के लिए फिर से 2 लाख रुपए स्वीकृत कराए गए। इस तरह आरईएस ने 2015 में काम पूर्ण कर बिहान समिति की अध्यक्ष सुषमा खलखो को भवन सौंप दिया।

तात्कालीन ईई ने भवन को बिहान समिति के अध्यक्ष को हैंडओवर किया था। मैंने स्वयं कागज देखा है। भवन के लिए आरईएस ने पहली किस्त 3.99 लाख और दूसरी रिवाइज्ड किस्त 2 लाख रुपए ली है। \\\'\\\' जी एन सिंह तंवर, ईई, आरईएस, रायगढ़

अब ढूंढ रहे किसके जिम्मे हैं भवन

मामला शासन के नजर में आने के बाद अब विभाग ढूंढ रहे हैं कि यह भवन किसके अंडर में है। समाज कल्याण और महिला बाल विकास ने ऐसे किसी भी भवन के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही है। हालांकि इनके द्वारा स्वयं भवन के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई थी। आरईएस ने इसके बाद भवन को निजी संस्था बिहान समिति को देना बताया था।

उपयोगिता प्रमाण पत्र भी निजी संस्था को

आरईएस ने बिल्डिंग बनने के बाद उसकी उपयोगिता प्रमाण भी निजी संस्था को ही सौंपी है। शासकीय अधिकारी बताते है कि किसी भी शासकीय बिल्डिंग के बनने के दौरान उसकी देखरेख संबंधित विभाग करता है। अंत में आरईएस उस संबंधित विभाग को ही उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करता है। यहां लेकिन निजी संस्था को ही उपयोगिता प्रमाण देकर हैंडओवर कर दिया गया है।

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