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रेलवे के क्वार्टरों की मरम्मत में धांधली, बेखबर हैं अफसर

3 वर्ष पहले
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रेलवे बोर्ड के आदेश पर टाइप वन के तहत बने क्वार्टरों को आपस में मर्ज कर टाइप टू का बनाया जा रहा है। इसके लिए पुराने मकानों को तोड़कर उन्हें फिर से मरम्मत किया जा रहा है। रेलवे ने इसके लिए बाकायदा टेंडर जारी कर ठेकेदार को दिया था। ठेकेदार ने जल्दबाजी में सभी मकानों में आधा-अधूरा काम कर छोड़ दिया है। जिन घरों की मरम्मत हुई है उसे तीन माह भी नहीं हुए हैं और प्लास्टर उधड़ने लगा है।

मरम्मत के वजह से हो रही परेशानी के बारे में रेलवे कर्मियों ने एईएन कार्यालय में शिकायत भी की है, लेकिन किसी अधिकारी का ध्यान इन बातों पर नहीं जा रहा है। ठेकेदार मनमाने ढंग से मरम्मत का काम किए जा रहा है। शिकायत के बाद भास्कर ने रेलवे के टाइप वन के कुछ क्वार्टरों में जाकर उसका हाल जानना चाहा। शनिवार की दोपहर डब्ल्यू कुमार के मकान 94/3 पर गई। यहां डब्ल्यू कुमार ने बताया कि छह माह से भी ज्यादा का समय हो गया है, उनके घर में मरम्मत का काम जारी है। मरम्मत करने के लिए पूरे घर को अस्तव्यस्त करके रखा गया है। बावजूद मरम्मत के काम में ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। फर्श पर झाडू चलाकर रेलवेकर्मी ने दिखाया। फर्श में थोड़ी सी रगड़ से ही बालू और सीमेंट दोनों धूल के रुप में उड़कर निकल रहे है। इसी तरह बाहरी दीवार पर हुआ प्लास्टर भी हाथ से मारने से ही गिर जा रहा है। इसके बाद 94/4 में शनिराम के घर गए। यहां भी लगभग वही हाल था। महिला ने बताया कि छह माह से काम चल रहा है। ठेकेदार द्वारा सही ढंग से काम नहीं किया गया है। इसके बाद टीम 94/9 में गौरी सतनामी के यहां पहुंची। यहां भी चार माह से मरम्मत काम के लिए घर में तोड़फोड़ कर छोड़ दिया गया है। दीवार न होने के कारण पर्दे के लिए रेलवे कर्मी ने साड़ी तानकर रखी है। इसी तरह 91/1 अनिल कुमार के मकान में भी यही हालत दिखे। यहां भी तीन महीने से मकान की छत को उधेड़ कर रख दिया गया है और कोई भी काम नहीं हो रहा है।

मकान बदले ही कर रहे मरम्मत का काम - मकान का मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन किसी का भी मकान बदला नहीं गया है। उसी मकान में तोड़फोड़ का काम चल रहा है और उसी में लोग रह भी रहे हैं। नाइट ड्यूटी में काम करने वाले लोग सुबह काम नहीं कर पा रहे हैं। महीनों से चल रहे काम के कारण कई लोग अपने घर भी छुट्टी पर नहीं जा पा रहे हैं तो कई लोग परिवार को अपने घर पर नहीं ला पा रहे हैं। बाथरूम के दरवाजों को उखाड़कर ले गए हैं और महिलाओं को कहीं जाने में भी दिक्कत हो रही है। इसी तरह घर के सामने नालियां भी जाम हैं।

लोग पैसे देकर खुद करा रहे रिपेयरिंग - हालत ऐसे है कि लोग पैसे देकर खुद रिपेयरिंग करा रहे हैं। 94/4 में रहने वाली महिला ने बताया कि ठेकेदार ने घर पर फर्श का काम कराया था, लेकिन उसमें से बालू और सीमेंट निकल रहा था। इसी कारण उन्होंने खुद अतिरिक्त पैसे देकर काम को करवाया। इसी तरह उनके घर के और भी काम है जो कि अधूरे ही पड़े हुए हैं।

रेलवे क्वार्टसर् जहां मरम्मत के नाम पर हो रही गड़बड़ी।

तीन महीने बाद छड़ रहा प्लास्टर

सीमेंट कम और बालू का मिश्रण ज्यादा
एक्सपर्ट बताते हैं कि पलस्तर उखड़ने की मुख्य वजह सीमेंट कम और बालू का मिश्रण ज्यादा होने से होता है। सीमेंट प्लास्टर में बालू को दीवार पर चिपकाने के लिए गोंद का काम करता है। मिश्रण में यदि सीमेंट की कमी हो जाए तो फिर प्लास्टर जल्दी उधड़ने लगता है। या फिर काम होने के बाद पानी कम दिया जाए फिर भी प्लास्टर उधड़ने लगता है। आर्किटेक्ट मानते हैं कि 1/5 और 1/6 का मिश्रण सबसे अच्छा होता है। हालांकि टेंडर के किसी भी प्रक्रिया में बालू और सीमेंट का मिश्रण पहले से तय होता है।

मैं कल जाकर स्वयं देखूंगा। किसी एक व्यक्ति का नाम बता दीजिए। उसी के घर में चला जाऊंगा।’’ शशांक कुलश्रेष्ठ, एईएन, रायगढ़ रेलवे

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