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1 अरब 81 करोड़ लीटर पानी के Rs.28 करोड़ नहीं दे रहा अंजनी स्टील, तकरार

3 वर्ष पहले
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कंपनी काफी वर्षों से जलकर नहीं पटा रही थी। इसी कारण उसे कई बार नोटिस दिया गया, लेकिन अब मामला कोर्ट में चला गया है। कोर्ट के फैसले के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। \\\'\\\' पीके शुक्ला, कार्यपालन अभियंता, केलो परियोजना रायगढ़

आर्बिट्रेशन कोर्ट में कंपनी और केलो के बीच तकरार।

इसी माह आर्बिट्रेशन कोर्ट में दोनों पक्षों की होगी सुनवाई।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

केलो बांध से पानी लेकर जल कर नहीं पटाने को लेकर केलो परियोजना और अंजनी स्टील के बीच विवाद शुरू हो गया है। कंपनी का दावा है कि उसकी जरूरत बेहद कम है और विभाग उसे 6 गुना अधिक पानी का बिल भेज रहा है। जबकि केलो परियोजना के अनुसार वह कंपनी और शासन के बीच हुए अनुबंध के हिसाब से ही बिल भेज रहा है।

कंपनी ने पैसे देने बंद कर दिए तो ब्याज दर इतनी अधिक हो गई है कि माह में लगभग 1 करोड़ तो ब्याज के ही हो रहे हैं। फिलहाल कंपनी और शासन के बीच आर्बिट्रेशन कोर्ट में मामला चल रहा है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इसी महीने इस मामले में आर्बिट्रेशन कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी। अंजनी स्टील इस्पात ने दिसंबर 2009 में केलो परियोजना के साथ 30 साल का अनुबंध किया था। अनुबंध में कंपनी ने अपनी जरूरत 1 अरब 81 करोड़ लीटर प्रतिमाह की बताई थी। विभाग ने तात्कालिक जल कर की दर के अनुसार अनुबंध कर लिया। वर्ष 2012 तक कंपनी ने पानी लिया और भुगतान भी करती रही, लेकिन इसके बाद कंपनी ने जुलाई 2012 से अचानक जल कर पटाना बंद कर दिया। लगातार तीन माह तक जल कर नहीं चुकाए जाने पर शासन ने उद्योग को नोटिस भेजा और बिल पटाने के लिए कहा। इसी पर विभाग का कहना है कि अनुबंध 30 सालों के लिए है। हम दूसरा ग्राहक कहां से ढूंढ कर लाएं। अनुबंध के दौरान सारे नियम कायदे समझा दिए गए थे। ऐसे में दोनों के बीच 2012 से विवाद शुरू हो गया और विवाद बढ़ता ही चला गया। आज स्थिति यह है कि कंपनी का ब्याज ही महीने का 1 करोड़ रुपए के लगभग पहुंच जा रहा है। यदि यही स्थिति कुछ साल रही तो ब्याज में ही कंपनी को करोड़ों रुपए का झटका लगेगा।

हाईकोर्ट से मामला पहुंचा आर्बिट्रेशन कोर्ट में
2014 में कंपनी ने केलो परियोजना को हाईकोर्ट में चैलेंज किया। मामला तकनीकी होने के कारण हाईकोर्ट ने इसे आर्बिटेशन कोर्ट में भेजा। 2015 से आर्बिटेशन कोर्ट में मामला चल रहा है। अभी तक इसमें कोई फैसला नहीं आ पाया है। हालांकि अधिकारियों के द्वारा जल्द ही इस संबंध में कोर्ट से फैसला आने की बात कही जा रही है। कोर्ट में भी कंपनी का यही दावा है कि उससे जरूरत से ज्यादा रुपए देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जबकि विभाग भी अपना पक्ष अनुबंध को रख रही है।

इस तरह से तय होती है जल कर की राशि
केलो बांध से अभी मात्र अंजनी स्टील का ही अनुबंध है। कंपनी को अभी वर्तमान में केलो परियोजना को लगभग 28 करोड़ 88 लाख रुपए चुकाने है। जो कि एक भारी रकम है। इस राशि में विभाग हर माह 2 प्रतिशत रुपए देने में विलंब करने पर और सरचार्ज 1 प्रतिशत लगा रहा है। इस हिसाब से ही हर माह कंपनी को लगभग 1 करोड़ रुपए केवल ब्याज के ही लग रहे है। कंपनी जितना विलंब करते जा रही है ब्याज की दर उतनी ही ज्यादा बढ़ रही है।

अब जमा करना शुरू किया
बीते तीन-चार महीने से कंपनी ने विभाग को पैसे देने शुरु किए हैं। हर महीने कंपनी Rs.3 से 4 लाख जमा कर रही है। इस हिसाब से कंपनी ने लगभग 48 लाख रुपए जमा करा दिया है। किसी तरह से कंपनी भी अपने ब्याज के बोझ को कम करना चाहती है जो कि अनजाने या जान बुझकर इतनी बड़ी राशि में बदल गई है।

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