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दोनों आरोपी को पकड़ने के बजाए पुलिस अस्पताल केे मेमो का करती रही इंतजार

3 वर्ष पहले
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स्कूल जा रही 12वीं की छात्रा के चेहरे पर 2 बाइक सवार एसिड फेंक कर फरार हो गए। घटना में लड़की के चेहरे का कुछ हिस्सा और गर्दन झुलस गया है। छात्रा को स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक इलाजर के बाद शनिवार को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया गया। मामले में एसिड पीडि़ता को कार्रवाई के लिए 28 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। जब इस संबंध में पुसौर थाना प्रभारी प्रदीप जायसवाल से पूछा गया तो उनका जवाब था, फोन तो आया था। अस्पताल से मेमो नहीं मिलने के कारण वे कार्रवाई नहीं कर रहे थे।

शनिवार को कार्रवाई के लिए पीड़िता की मां ने पुसौर थाना पहुंची, तब जाकर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस को दिए बयान में युवती ने एक आरोपी की पहचान की है। उसके अनुसार आरोपी लड़का उसके साथ पढ़ता था। वह आए छेड़खानी का प्रयास करता था। सफल नहीं हुआ तो उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। पीड़िता ने बताया कि कुछ दिन पहले भी युवक ने उसपर कुछ केमिकल फेंका था, जिसकी कुछ बूंदें ही कपड़ों पर पड़ी। वो स्पॉट काला हो गया था । उसने घर में जाकर अपनी मां को इसकी जानकारी दी थी लेकिन उसने लड़के का नाम स्पष्ट नहीं बताया इसलिए परिजन इसे हल्के में ले लिए।

बेटी को अस्पताल में भर्ती करने के बाद थाने पहुंची मां तब हरकत में आए
मेकाहारा में पुलिस को अपना बयान देती पीड़ित युवती।

जानिए इससे पहले कब-कब हुआ एसिड अटैक
केस 1. पुसौर ब्लॉक के कोतमरा गांव में 9 मार्च 2013 को उमाकांत चौहान ने एकतरफा प्रेम के चलते 4 नाबालिग बहनों पर एसिड फेंका था। इस दौरान एक नाबालिग गंभीर रूप से झुलसी थी। तीन बहनें एसिड की चपेट में आई थीं। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

केस 2. 26 जून 2016 की सुबह तकरीबन 10 बजे शहर के कोतवाली क्षेत्र में एक महिला के सीने पर केरोसीन के साथ एसिड मिलाकर छिड़क दिया था, लेकिन कोतवाली पुलिस ने इस मामले में एसिड संबंधित धारा नहीं लगाई।इ ससे आरोपी के ऊपर मामूली कार्रवाई हुई।

24 घंटे तक उप पुलिस अधीक्षक थे अनजान बाद में कहा-दूसरा ज्वलनशील पदार्थ है
इस मामले की जानकारी 24 घंटे तक उप पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर को भी नहीं मिली थी। दोपहर 2 बजे उनसे फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने कहा ऐसे किसी मामले के संबंध में जानकारी नहीं है। शनिवार रात लगभग 8.30 बजे फोन पर उन्होंने बताया कि यह संभवत: एसिड अटैक का मामला नहीं है। आरोपियों ने एसिड जैसी कोई दूसरी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया है।

सीधी बात | मामले की सुध ली थी पर कर्मचारी नहीं गए

प्रदीप जायसवाल, थाना प्रभारी, पुसौर

आपके थाना क्षेत्र में एसिड अटैक वाला मामला आया है?

हां आया तो है, लेकिन एसिड है या कोई दूसरा ज्वलनशील पदार्थ अभी कंफर्म नहीं हुआ है।

इस मामले की सूचना आपको कब और कैसे मिली?

शुक्रवार को किसी व्यक्ति ने ने मुझे फोन पर घटना जानकारी दी थी।

क्या आपने मामले की जांच करवाई, या आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया।

हमारे पास लिखित में अस्पताल से सूचना नहीं मिली इसलिए हमने जांच नहीं करवाई।

तो क्या किसी मामले में लिखित में जानकारी होना जरूरी है, उधर पीडि़ता तड़प रही थी और आप लिखित में जानकारी का इंतजार कर रहे थे?

ऐसा नहीं है, सूचना मिलने के बाद आज सुबह मैने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को मामले की जांच करने जाने कहा था, मगर वो नहीं गए।

देर रात आरोपियों पर जुर्म दर्ज

आरोपियों के खिलाफ धारा 326 में जुर्म दर्ज किया है। इसमें 10 साल जेल से लेकर उम्रकैद तक की सूचना है। यह धारा तब लगाई जाती है जब कोई शख्स किसी हथियार से किसी को गंभीर रूप से जख्मी कर देता है। ऐसा जख्म देना, जिससे जान को खतरा हो जैसे अपराध इसी केटगरी में आता हैं। अगर किसी के साथ मार-पीट कर कोई हड्डी या दांत तोड़ दे

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