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श्रद्धा, आलोक व वैभव बने सिविल जज

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | रायगढ़/दानसरा

वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में जिले के तीन होनहारों ने सफलता प्राप्त की है। रायगढ़ की बेटी श्रद्धा सिंह, सुभाष चौक के आलोक अग्रवाल और सारंगढ़ बीएमओ के पुत्र वैभव धृतलहरे सिविल जज बन गए हैं।

सिविल जज बनने वाली रायगढ़ की बेटी श्रद्धा सिंह श्रीवास्तव जिद कर दुनिया बदलने की मिसाल बनी हैं। बीएससी, एलएलबी और फिर एलएलएम करने के बाद श्रद्धा 1999 में सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में टापर रहीं और सूबेदार बनीं। कोरबा में लगभग दो सालों तक सेवा दी। 2002 में सिविल जज परीक्षा पास कर वे न्यायिक सेवा में आईं। कुछ कारणों से श्रद्धा की सेवा समाप्त कर दी गई थी। पहले निराशा के बाद श्रद्धा के पति वैभव श्रीवास्तव, परिवार के लोग और मित्र अबरार हुसैन ने उन्हें हौसला दिया। उन्होंने ठाना कि न्यायिक सेवा में वो दोबारा लौटेंगी। परिवार की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने परीक्षा की तैयारी की। स्कूल के दिनों से ही मेधावी छात्रा रहीं श्रद्धा को अब फिर सफलता मिली है। श्रद्धा के हौसले के कारण इंटरव्यू के दौरान उनकी सराहना भी हुई।

शहर के आलोक अग्रवाल भी इस परीक्षा में सफल हुए हैं। मध्यमवर्गीय व्यवसायी परिवार के आलोक कहते हैं कि उन्होंने एलएलबी करने के साथ ही न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य रखा था। दो बार पहले परीक्षा दी। मध्य प्रदेश की सिविल जज परीक्षा 2015 में वे जब इंटरव्यू तक पहुंचे तो इससे उनका हौसला बढ़ा। आलोक ने कोचिंग नहीं की और वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, एडीजे सुनील कुमार नंदे, मोहिनी कंवर के साथ अपने सीनियर अधिवक्ता खुर्तीजा खान को देते हैं। कुछ समय तक जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले आलोक कहते हैं कि कई वर्षों तक सिविल जज की परीक्षा नहीं हुई लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा और आखिरकार सफलता मिली। वहीं वैभव धृतलहरे भी सिविल जज बने। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा सैनिक स्कूल रीवा में प्राप्त करने के पश्चात एचएनएलयू रायपुर से बीए एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। वैभव की सफलता पर सारंगढ़ क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

पीएससी द्वारा आयोजित सिविल जज परीक्षा में जिले के तीन लोग चयनित, श्रद्धा पूर्व में भी जज रह चुकी हैं
श्रद्धा सिंह श्रीवास्तव

आलोक अग्रवाल

वैभव धृतलहरे

जिले में बना माहौल
पिछले पांच सालों में जिले में प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर माहौल बना है। साधनों के अभाव के बाद भी युवा सिविल व न्यायिक सेवा के साथ अन्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बड़े पदों पर कुछ चयन से तैयारी कर रहे लोगों का हौसला बढ़ा है।

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