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ग्रामीणों ने जमीन दान में देने सहमति पत्र दिया, फिर भी नहीं बन रही सड़क, करेंगे चुनाव का बहिष्कार

3 वर्ष पहले
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पुसौर ब्लाक के गांव अमलीपाली के लोगों ने 2013 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। ग्रामीण मुख्य मार्ग से लगभग डेढ़ किमी अंदर अपने गांव तक पहुंच मार्ग चाहते थे। वोटिंग कराने के लिए तब अफसरों की टीम गांव पहुंची। चुनाव के बाद सड़क बनाने का भरोसा दिलाया और वोटिंग करा दी। इसके साढ़े चार साल बाद न तो यहां कोई अफसर पहुंचा और न ही कोई नेता। अब गांव वाले जमीन दान देने के लिए भी तैयार हैं लेकिन प्रशासन सड़क नहीं बनवा रहा है। अब गांव वाले किसी भी हाल में अगले चुनाव का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं।

लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव के भीतर न तो संजीवनी आती है और न ही महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस, पगडंडीनुमा रास्ता है जिसमें बड़ी मुश्किल से बाइक या साइकिल चल सकती है। बरसात के दिनों में इस पर भी चलना मुश्किल हो जाता है। एक स्कूल है, बारिश के बाद यहां बाहर से शिक्षक नहीं आते हैं इसलिए पढ़ाई नहीं हो पाती है।

संजीवनी या महतारी नहीं पहुंच पाती, कोई बीमार हो तो खाट पर ढोकर डेढ़ किमी दूर मुख्य सड़क तक ले जाते हैं

जमीन देने को तैयार फिर भी नहीं बना रहे सड़क

गढ़उमरिया मुख्य मार्ग (गोले से घिरा) से ग्राम अमलीपाली जाने वाली पगडंडी।

600 मीटर दूर है पानी की टंकी. गांव के पहले एक बोर है, वहां टंकी बनी है। बस्ती से इसकी दूरी 600 मीटर है। गांव की महिलाएं निस्तारी और पीने के लिए यहां से पानी लेकर आती हैं। रोज पानी ढोकर लाना इनकी दिनचर्या है। न तो टंकी से बस्ती तक पाइप लाइन बिछी है और न ही यहां सूख चुके तालाब का गहरीकरण कराया गया है। अमलीपाली, आमापाली पंचायत का आश्रित गांव है।

गढ़उमरिया मुख्यमार्ग से बाईं ओर लगभग डेढ़ किमी अंदर गांव अमलीपाली में सड़क की मांग सालों पुरानी है। जब चुनाव का बहिष्कार किया तो तत्कालीन एसडीएम पुलिस के अफसरों के साथ गांव पहुंचे थे। लोगों को मना लिया। वोटिंग के बाद प्रशासन ने सड़क के लिए मार्किंग करा दी। गांव वालों से अफसरों ने कहा, जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा, समय लगेगा। ग्रामीणों ने दो-दो हजार चंदा कर मिट्‌टी पटवाई और पगडंडी बनवा ली। 26 अप्रैल 2014 को 12 से अधिक ग्रामीणों, जिनकी जमीन पर सड़क बननी थी, ने सहमति पत्र देकर अपने हिस्से की जमीन दान में देने की पेशकश की। विजय, संतराम, सीमांकन, रोहित, वासुदेव, बीरसिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने अपने हिस्से की जमीन का खसरा, नक्शे के टुकड़े की मार्किंग कराकर एसडीएम को दे दिया। वे चाहते थे किसी तरह भी गांव में सड़क बन जाए। ग्रामीण कहते हैं कि ज्यादा तकलीफ इस बात से है कि जमीन देने के बाद भी आखिर सड़क क्यों नहीं बन रही है।

रास्ते में ही हो जाती है डिलीवरी

गांव में ही मितानीन महिला ने बताया कि प्रसूति के लिए किसी गर्भवती महिला को पुसौर अस्पताल ले जाया जाता है तो बड़ी दिक्कत होती है। घर से मुख्य मार्ग तक खाट पर लिटा कर ले जाना पड़ता है। गांव के नवीन चौहान बताते हैं कि उनकी गर्भवती प|ी को 19 नवंबर 2016 को डिलीवरी के लिए पुसौर ले जाना था। फोन किया तो महतारी एक्सप्रेस के ड्राइवर ने गाड़ी मुख्य मार्ग पर लगा दी और बोला यहां आ जाओ, अंदर नहीं जा पाएंगे गाड़ी लेकर। परिवार के लोग महिला को लेकर जा रहे थे और पगडंडी पर ही महिला की डिलीवरी हो गई। जच्चा-बच्चा को बड़ी मुश्किल से फिर पुसौर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

बारिश में पढ़ाई हो जाती है ठप

भास्कर की टीम जब गांव में पहुंची तो गांव को 150 से ज्यादा लोग बाहर चबूतरे पर बैठकर अपनी समस्या बताने लगे। गुस्साए लोगों ने कहा, चाहे कोई भी मनाने आए, हम इस बार चुनाव में शामिल नहीं होंगे। पालकों ने बताया कि गांव में पांचवीं तक स्कूल है। यहां अमलीपाली के साथ ही औरदा और आसपास के बच्चे आते हैं। बारिश के दिनों में कभी बच्चे नहीं पहुंच पाते तो कभी रास्ता नहीं होने के कारण शिक्षक ही नहीं आते, इससे पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है।

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