दूषित पानी से बना रहे कोल्ड ड्रिंक पुकार, डेढ़ साल पहले चेतावनी दी पर दुबारा देखने नहीं गए अफसर
जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर कोड़ातराई में पुकार की कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री चल रही है। यहां हर रोज 150 पेटी कोल्ड ड्रिंक तैयार की जाती है। बाजार में 300 मिलीलीटर की बाटल 6 रुपए में बेची जा रही इसलिए खपत भी ज्यादा है। वहां के कर्मचारी राजू चौहान के अनुसार कंपनी को हर साल करीब 20 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है। इसके बाद भी फूड एवं सेफ्टी विभाग के फैक्ट्री की जांच करने की जरूरत नहीं समझ रहे। पूछने पर अफसर का कहना है डेढ़ साल पहले फैक्ट्री की जांच की थी तब गड़बड़ी मिलने पर व्यवस्था सुधारने की चेतावनी दी गई थी।
गुणवत्ताविहीन कोल्ड ड्रिंक बिकने की शिकायत मिलने पर भास्कर टीम शुक्रवार को फैक्ट्री की पड़ताल करने पहुंची तो पाया कि 15 बाई 20 के एक कमरे में कोल्ड ड्रिंक बनाने से लेकर पैकिंग तक का काम हो रहा है। जिस मशीन में कोल्ड ड्रिंक बन रही है। उसके चारों ओर गंदगी पसरी मिली। फैक्ट्री संचालक बिना पैकेजिंग और एक्सपायरी डेट लिखे ही कोल्डड्रिंक को बॉटल में पैक करा रहा है। इसके बाद भी पिछले डेढ़ साल से फैक्ट्री की जांच करने की जहमत किसी अफसर ने नहीं उठाई। पूछने पर पता चला यह भाजपा नेता रमेश अग्रवाल की फैक्ट्री है इसलिए अफसर यहां झांकने तक नहीं आते।
कोड़ातराई की कोल्ड ड्रिंक बनाने की फैक्ट्री में मापदंडों का नहीं हो रहा पालन
सीधी बात
सुधा चौधरी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
शहर सहित जिले में बिना पैकिंग, एक्सपायरी डेट के कोल्ड ड्रिंक बिक रहा है। इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
मैं अभी रायपुर में हूं। कार्रवाई के लिए टीम बना रहे हैं।
गर्मी में खपत बढ़ गई है फिर अब तक टीम ने जांच शुरू क्यों नहीं की?
टीम बना रहे हैं फिर हर हफ्ते जांच में भी निकलेंगे।
यदि कोई कंपनी बिना पैकिंग, एक्सपायरी डेट के कोल्ड ड्रिंक बेच रही है, तो किस तरह की कार्रवाई होगी?
यदि ऐसा हुआ तो प्लांट को सील कर दिया जाएगा। जुर्माना और जेल का भी प्रावधान है।
कोड़ातराई के पुकार कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री में जांच के लिए कब गए थे?
डेढ़ दो साल पहले गए थे। कंपनी को सुधार की चेतावनी भी दी थी। अब हमारी टीम दुबारा जांच करेगी। गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई करेंगे।
एक्सपर्ट व्यू. डॉ प्रकाश चेतवानी ने कहा अगर कोल्ड ड्रिंक बिना फिल्टर किए गए पानी से बन रहा है तो इसके सेवन से पीलिया, डिसेंट्री, उल्टी दस्त, माइग्रेन, याददाश्त कम होना, इमोशनल डिस आर्डर, दिखने में कमी, सुनने में कमी, सांस लेने में दिक्कत जैसे बीमारी हो सकती है। रसायनशास्त्री प्रोफेसर धनेश सिंह का कहना है कि इसमें मौजूद फास्फोरिक एसिड हमारी हड्डियों को कमजोर कर देता है। उन्होंने मोटापा को भी इसका कारण बताया।
ये अनियमितताएं भी मिली. एक्सपायरी डेट का लेवल गायब: यहां पुकार नाम की सॉफ्ट ड्रिंक तैयार की जा रही थी, जिसमें कोला, ऑरेंज, लैमन, मैंगो व अन्य फ्लेवर के ड्रिंक्स थे। पैक की गई कोल्ड ड्रिंक के ऊपर एक्सपायरी डेट नहीं थी। कोल्ड ड्रिंक में अलग-अलग फ्लेवर की मात्रा निर्धारित करने वाली मशीन भी कहीं नहीं थी। पहली नजर में ही कोल्ड ड्रिंक की यह फैक्टरी फर्जी मिली।
कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री और पैकेज्ड पानी प्लांट संचालन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने कई नियम बनाए हैं। इसके अनुसार कोल्ड ड्रिंक बनाने से पहले पानी की शुद्धता नियमित जांच करने के लिए कंपनी में लैब और लैब टेक्नीशियन होना चाहिए। पानी टैंक और पाइप स्टील के होने चाहिए। जिसकी हर दिन सफाई की जानी चाहिए। जमीन से पानी लेने के लिए संबंधित निकाय या ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना जरूरी है। पानी का टीडीएस 80 से 95 के बीच होना चाहिए।
मापदंडों का नहीं हो रहा पालन
बिल नहीं देते इसलिए बच जाते हैं. ज्यादातर दुकानदारों का कहना है कि कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री चलाने वाला संचालक कंपनी सैम्पल दिखाकर कोल्ड ड्रिंक की सप्लाई कर रहा है। कंपनी की ओर से दुकानदार को कोल्ड ड्रिंक का बिल भी नहीं देता। यदि फूड एंड सेफ्टी विभाग कार्रवाई कर भी दे, तो बिल के अभाव में कंपनी की खपत का नहीं पता चलता और संचालक टैक्स भरने से बच जाता है।
ऐसा था वहां का नजारा. एनएच के किनारे घर के पिछले हिस्से में छोटे से हाल में मशीनें में एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी कोल्ड ड्रिंग बनाते नजर आए। बड़े टप में पानी व केमिकल डालकर अलग-अलग फ्लेवर की कोल्ड ड्रिंक बनाई जा रही थी। 300 एमएल की हजारों बोतलों में कोल्ड ड्रिंक से भरी मिली। केमिकल व अन्य रसायन बड़े टप में घोलकर इन्हें बोतलों में भरने के लिए मशीन का प्रयोग हो रहा था।