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फ्लोरोसिस से पूरा गांव बीमार, पानी से फ्लोरीन हटाने वाली मशीन 2 साल से खराब, नेता व विभाग बेखबर

4 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | रायगढ़/ तमनार

पानी में फ्लोराइड की अधिकता के कारण तमनार ब्लॉक के मुड़ागांव के ज्यादा परिवार हड्डी की बीमारी से जूझ रहे हैं। 50 सालों से ज्यादा पुरानी समस्या को दूर करने के लिए पहले ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था। इसके बाद पानी से फ्लोराइड दूर करने के लिए 6 रिमूवल प्लांट लगाए गए थे लेकिन पिछले दो सालों से सभी रिमूवल प्लांट्स अलग-अलग वजहों से बंद पड़े हैं और ग्रामीण फ्लोराइड वाला पानी पीने की मजबूर हैं। घरों तक साफ पानी पहुंचाने के लिए नल-जल योजना शुरू की गई थी लेकिन अब इससे पानी नहीं मिल रहा है।

पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण यहां बच्चे-बूढ़ों की रीढ़, हाथ-पांव की हड्डियों में विकृति है। अधिकांश ग्रामीणों के दांत खराब हैं। 30 से अधिक उम्र के लोगों के जोड़ों में दर्द रहता है, जिस कारण कोई मेहनत का काम ग्रामीण नहीं कर पाते। इसी तरह बुढ़ापे से पहले ही कई लोगों की कुबड़ निकल आई है। भास्कर ने जब इस मामले में क्षेत्र के नेताओं से बात की, कोई सरकार पर आरोप लगा रहा है तो कोई ग्रामीणों का ही दोष बता रहा है। पीएचई के ईई तो मानने के लिए तैयार ही नहीं कि रिमूवल प्लांट बंद पड़ा है। लाचारी जता रहे हैं कि बैट्री चोरी हो जाती है। तमनार ब्लॉक लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। शेष | पेज 14

मुड़ागांव, सराईटोला, पाता और झेराडीपा ऐसे चार बस्ती है, जहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है। पानी में सामान्य फ्लोराइड का मानक 1 लीटर में 1 से 1.5 मिलीग्राम तक है। मुड़ागांव और सराईटोला में फ्लोराइड की मात्रा पानी में 2.5 से 3 मिलीग्राम प्रति लीटर है। ये काफी गंभीर है। फ्लोरोसिस से हड्डियां कमजोर होती हैं। गांव में फ्लोराइड की लगातार समस्या को देखते हुए यहां स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए दो उपाय किए गए थे। जिनमें फ्लोराइड रिमूवल प्लांट और दूसरी जगह से पेयजल नलजल की योजना के तहत घरों तक पहुंचाना था। दोनों ही योजना आज ठप पड़ी हुई है।

फैक्ट फाइल
गांव का नाम जहां समस्या- मुड़ागांव, सराईटोला, पाता, बटुराकछार

जनसंख्या जो प्रभावित है- लगभग 1500

20011-12 में पीएचई ने 6 फ्लोराइड रिमूवल प्लांट बनाए

जानकारी के अनुसार एक प्लांट में अनुमानित लागत- 8 लाख

पानी में फ्लोराइड की सामान्य मात्रा- 1 लीटर में 1 से 1.5 मिलीग्राम

वर्तमान में बिना फिल्टर के पानी में फ्लोराइड - 2.5 से 3 मिलीग्राम प्रतिलीटर

जनप्रतिनिधियों से भास्कर ने पूछा उन्होंने क्या किया समस्या दूर करने
पुरानी समस्या तुरंत कैसे खत्म होगी
लैलूंगा विधायक और संसदीय सचिव सुनीति राठिया कहती हैं कि पुरानी समस्या है तुरंत तो खत्म नहीं हो सकती। अगर रिमूवल प्लांट दो सालों से बंद होता तो मु़झे जानकारी मिल जाती। बीच में खराब हुआ था। उसे बनाया गया था। यदि फिर ऐसी समस्या है तो मैं जाकर देखती हूं। आप भी आइए साथ में चलते हैं।

स्वयं जाकर दिखवाता हूं
स्वयं जाकर दिखवाता हूं
सालों पुरानी समस्या, नेता रोज गुजरते हैं, दूर नहीं की समस्या
बड़े से बच्चों तक का शरीर विकृत किया फ्लोराइड युक्त पानी ने।

अभी तक सारे रिमूवल प्लांट ठीक थे। हालांकि बीच-बीच में समस्या आती है जिसे दूर कर दिया जाता है। मैं जाकर फिर से देखता हूं कि आखिर समस्या क्या है। अशोक साहू, एसडीओ, पीएचई

अभी तक सारे रिमूवल प्लांट ठीक थे। हालांकि बीच-बीच में समस्या आती है जिसे दूर कर दिया जाता है। मैं जाकर फिर से देखता हूं कि आखिर समस्या क्या है। अशोक साहू, एसडीओ, पीएचई

फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे ग्रामीण
पूर्व विधायक हृदयराम राठिया कहते हैं, गांव में स्वच्छ पानी को लेकर बेहद दयनीय स्थिति है। ग्रामीण बोरिंग का पानी ही पी रहे हैं। फ्लोराइड रिमूवल प्लांट भी सालों से बंद पड़ा हुआ है। मैने अपने वक्त में प्रभावित लोगों की अलग बस्ती बसाकर स्वच्छ पानी की व्यवस्था कर दी थी। जो कि अब खत्म हो चुकी है।

लोग ही नहीं मानते इसमें हम क्या कर सकते हैं
पूर्व मंत्री सत्यानंद राठिया गांव की समस्या को बहुत पुरानी बताते हैं। उन्होंने कहा, शासन से पत्राचार कर यहां के लोगों को विस्थापित करा दिया था। फ्लोराइड की समस्या दूर करने के लिए प्लांट भी लगवाया है, लेकिन लोग मानते ही नहीं है और बोरिंग का पानी इस्तेमाल करते हैं।

साल में एक महीने चलती है नलजल योजना
मुड़ागांव में नलजल योजना के तहत टंकी बनवाई गई। गांव में जिस जगह पर पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य थी वहां बोर खोदकर पाइप के जरिए टंकी में पानी भरा जाता था। यह पानी लोगों के घरों तक पहुंचता था लेकिन बोर खराब होने के कारण ये सप्लाई बंद हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कभी कभार ही उन्हें नलजल योजना के तहत पानी मिल पाता था।

लड़के लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही है
पानी में फ्लोराइड की अधिकता से ग्रामीणों में विकलांगता तो आ रही है यह सामाजिक अभिशाप भी बन गया है। गांव में न तो लड़के-लड़कियों की उम्र निकली जा रही है लेकिन शादी नहीं हो रही है। भास्कर को स्थानीय लोगों ने बताया कि जो लोग फिलहाल शारीरिक रूप से ठीक हैं उनसे भी दूसरे गांव के लोग आशंका में शादी नहीं करना चाहते हैं।

फ्लोरोसिस और उसके प्रभाव. साधारण पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने पर मानव शरीर में फ्लोराइड हड्डियों से हाइड्रॉक्साइड को हटाकर खुद जमा हो जाता है और अस्थि फ्लोरोसिस को जन्म देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फ्लोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे दांतों, हड्डियों और अंदरूनी अंगों पर इसका असर पड़ता है। इससे कमजोरी के साथ लोगों में हीनभावना भी आ जाती है, जिससे वे समाज से अपने आप को अलग मानना शुरू कर देते है।

बच्चे से लेकर बूढ़े सभी प्रभावित
भास्कर ने पड़ताल में पाया कि बच्चे से लेकर बूढ़े कोई भी इस बीमारी से बचा हुआ नहीं है। महज 8 साल की बच्ची प्रतिमा सिदार भी इस बीमारी से से पीड़ित है। बच्ची के दांत बुरी तरह से सड़ रहे है। इसी तरह गांव के 70 प्रतिशत युवाओं के दांत खराब है और हड्डी भी बेहद कमजोर है। कई लोग जो कि मात्र 30 या 35 साल के है उनके जोड़ों में दर्द की समस्या है।

नागपुर की एजेंसी ने लगाया था रिमूवल प्लांट
नागपुर की एजेंसी ने वर्ष 2011-12 में तमनार व घरघोड़ा के 6 गांवों में फ्लोराइड को नियंत्रित करने वाला प्लांट लगाया था। यह प्लांट कुछ समय बाद ही खराब होने लगा। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि बीते दो सालों से मुड़ागांव,पाता और सराईटोला में लगे मशीन में बैटरी चोरी हो चुकी है। यहां की मशीनें बंद पड़ी हुई है। इस बात की जानकारी लैलूंगा विधायक को भी नहीं है।

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