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कम ा ल का नाटक

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | बेंगलुरू/नई दिल्ली

चुनाव पूर्व अनुमानों के अनुसार कर्नाटक की जनता ने खंडित जनादेश दिया है। मंगलवार को घोषित नतीजों में भाजपा सबसे बड़ा दल तो बनी, लेकिन बहुमत से 8 सीट पीछे रह गई। दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस ने तेजी से फैसला लेकर भाजपा की रणनीति से ही उसे अटका दिया। तीसरे नंबर पर रहकर किंगमेकर बनने का सपना देख रही जेडीएस को कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन दे दिया। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने तुरंत ऑफर स्वीकार किया और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। भाजपा ने भी दावा पेश किया है।

गोवा, मणिपुर और मेघालय में कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनकर भी सरकार नहीं बना पाई थी।

राजभवन में राजनीति

कांग्रेस ने राज्यपाल को दिखाया गोवा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कहा- सबसे बड़े दल को शपथ जरूरी नहीं: कांग्रेस ने गोवा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्यपाल को दिखाया। कोर्ट ने कहा था, \\\"सबसे बड़े दल को शपथ दिलवाना जरूरी नहीं। 2-3 दलों के पास ज्यादा संख्या है तो उन्हें शपथ दिलवा सकते हैं।\\\' कांग्रेस ने कहा- राज्यपाल इसके खिलाफ नहीं जा सकते।

जेडीएस बोली- कुमारस्वामी 18 को शपथ लेंगे

भाजपा का दावा- सरकार तो हम ही बनाएंगे

कर्नाटक में सरकार बनने के दो फॉर्मूले

फॉर्मूला 1 कांग्रेस+जेडीएस+अन्य यानी (78+38+1=117)

आंकड़े बहुमत से ज्यादा हैं। लेकिन यह चुनाव के बाद का गठबंधन है। ऐसे में राज्यपाल पर कोई संवैधानिक या नैतिक दबाव नहीं है कि इस गठबंधन को ही पहला मौका दें।

फाॅर्मूला 2 भाजपा+जुटाए विधायक यानी (104+8=112)

भाजपा को कम से कम आठ विधायकों की जरूरत है। एेसे में कांग्रेस या जेडीएस से कम से कम आठ विधायक तोड़ने होंगे। सबसे बड़े दल के नाते राज्यपाल ने भाजपा को न्योता दिया तो उसे बहुमत जुटाने के लिए मोहलत मिल जाएगी।

कांग्रेस ने भाजपा को उसी की रणनीति से घेरा

...और एक संभावना ऐसी भी हो सकती है

इन दो फॉर्मूलों के अलावा एक तीसरी स्थिति भी संभव है। न्योता मिलने के बाद भी भाजपा बहुमत साबित करने में नाकाम रही तो कांग्रेस-जेडीएस काे गैर भाजपा सरकार बनाने का मौका मिल सकता है।

अब दारोमदार राज्यपाल वजुभाई के हाथों में

राज्यपाल वे, जिन्होंने मोदी के लिए कभी अपनी सीट छोड़ी थी

सरकार किसकी बनेगी, यह इस पर निर्भर है कि राज्यपाल वजुभाई वाला किसे न्योता देंगे। नरेंद्र मोदी के गुजरात में सीएम के तौर पर 13 साल के कार्यकाल में वजुभाई वाला 9 साल तक वित्त मंत्री थे। 2001 में मोदी के पहले विधानसभा चुनाव के लिए वजुभाई ने राजकोट सीट छोड़ दी थी।

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