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घनी आबादी में 150 से ज्यादा 80 साल पुरानी इमारतें 10 साल में 50 को सिर्फ नोटिस, तोड़ एक भी नहीं पाए

3 वर्ष पहले
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रायपुर डीबी स्टार

डीबी स्टार टीम से शहर के लोगों ने जर्जर मकान नहीं टूटने से हादसे का अंदेशा जताते हुए शिकायत की। टीम ने इसकी पड़ताल की। इस दौरान खुलासा हुआ कि निगम ने 10 साल पहले जर्जर मकानों का सर्वे कराया था। तब 150 से ज्यादा मकानाें को घनी आबादी के बीच जर्जर पाया था। लिहाजा उनमें से सिर्फ 50 जर्जर इमारतों को तोड़ने का नोटिस दिया। फिर भी कुछ ही जर्जर मकान तोड़ पाए है, जबकि मुख्य मार्गाें मेें अब भी जर्जर मकान है। ज्यादातर बारिश के समय में ही स्थिति खराब हो जाती है। बस्तियों के मकानों में सबसे ज्यादा खतरा होता है। तीन महीने बाद बारिश है, ऐसे में फिर बड़ी दुर्घटना की आशंका बन जाती है।

जोनवार जर्जर मकानों की संख्या

जोन-1

20
जोन-2

25
जोन-3

20
जोन-4

40
जोन-5

35
जोन-6

20
जोन-7

12
जोन-8

18
जानिए, क्यों नहीं तोड़वाए जा सके जर्जर मकान
जोन के जिम्मेदारों की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब में ज्यादातर लोगों ने जमीन विवाद कोर्ट में लंबित बताया, इस वजह से अधिकारी नहीं बना पा रहे दबाव

इनमें कुछ ऐसे भी सम्पत्ति मालिक हैं,जिन्होंने मकान के बाहरी ढाचे का मेंटेनेंस कराके निगम को भवन की स्थिति में सुधार दिखाकर उसे किराए पर दे दिया

30 से ज्यादा के मालिकों ने निगम से समय लेने के बाद भी मकान को तोड़ने की प्रक्रिया को अटका दिया है, इसमें जर्जर भवन नहीं तोड़े गए।

इन जगहों पर जर्जर मकान हादसे का बन सकते हैं कारण
वॉल्टियर लाइन के पास ही तीन ऐसे मकान है,जो मेंटेनेंस नहीं कराए जाने की वजह से रहने लायक नहीं हैं। इसके बाद भी मुख्य मार्ग पर बने 9 से ज्यादा ऐसे मकानों में दुकाने संचालित की जा रही है। वहीं चूनाभट्‌ठी इलाके में तो 20 से ज्यादा मिट्‌टी और ईंट से बने 100 साल से भी ज्यादा पुराने मकान हंै, जो खस्ताहाल हो चुके हैं। पुरानीबस्ती, लाखेनगर क्षेत्र में बने 35 से ज्यादा मकानों को लोगों ने 110 साल पुराना बताया। वहीं पंडरी मार्ग पर 17 से ज्यादा बिल्डिंग जर्जर हो चुकी हंै।

DB Star
बैजनाथपारा, नलघर चौक
investigation
जीई रोड, बांसटाल गली
फाफाडीह, स्टेट बैंक के बाजू
एक्सपर्ट व्यू
 वर्तमान में बनाए जाने वाले कांक्रीट मकानों के लिए बने गाईड लाइन की बात करें तो इनकी सर्विस लाइफ 60 साल की मानी जाती है। इतने पुराने मकानों को बैंक लोन नहीं देते हैं। मेंटेनेंस नहीं कराए जाने की वजह से भी जर्जर होते हैं। अगर 60 साल पुराने मकानों में दरारें हों तो उन्हें तोड़कर नया बनाना चाहिए। मनीष पल्लीवार, आॅर्किट्रेक्ट, रायपुर

मकान मालिकों पर करवाएंगे एफआईआर

 अभी तक जितने भी बार जर्जर मकान के स्वामियों को नोटिस दिया गया। उन्होंने आपसी विवाद और कोर्ट में प्रकरण लंबित होने की दलील दी है। कुछ जगह पुराने भवनों को तोड़ा भी गया है। लेकिन अब निगम ऐसे लोगों को नोटिस देने के बाद भवन नहीं ढहाए जाने पर जनहित में एफआईआर कराएगा। इस बारिश से पहले अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। रजत बंसल, आयुक्त, नगर निगम, रायपुर

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